मतभेद बहुत गहरे हैं

वार्ता से क्या हासिल हुआ? इस प्रश्न पर अधिकारियों ने साफ कहा कि वे किसी सफलता की उम्मीद नहीं रख रहे थे। वास्तव में भी ऐसी कोई सफलता मिली भी नहीं है।

संपन्नता की असमानता

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ताजपोशी तीसरे पांच साला कार्यकाल में करने हेतु चीनी कम्युनिस्ट पार्टी जोर-शोर से तैयारियां कर रही है।

चीनी नेतातंत्र या भारतीय लोकतंत्र?

चीन में माओ त्से तुंग के बाद चार बड़े नेता हुए। तंग स्याओ फिंग, च्यांग जोमिन, हू जिन्ताओ और शी चिन फिंग ! माओ के बाद तंग को इसीलिए सबसे बड़ा नेता माना गया, क्योंकि उन्होंने चीन को नई दिशा दी थी।

मोदी और शी सीधे बात करें

चीन की संसद ने 23 अक्तूबर को जो नया कानून पास किया है, उसे लेकर हमारा विदेश मंत्रालय काफी परेशान दिखाई पड़ता है।

अमेरिका- चीन में सुलह!

विश्लेषकों की राय रही है कि अमेरिका और चीन के बीच सचमुच सैनिक टकराव हुआ, तो वह ताइवान के सवाल पर ही होगा।

आखिर क्या है चीन नीति?

ये तो साफ है कि अब चीन झुक कर अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखने के मूड में नहीं है। तो क्या अब अमेरिका झुक कर चलेगा?

शी और बाइडन से सीखें मोदी

जब हमारे फौजी अफसर चीनियों से बात कर सकते हैं तो अपने मित्र शी चिन फिंग से, जिनसे मोदी दर्जन बार से भी ज्यादा मिल चुके हैं, सीधी बात क्यों नहीं करते ?

9 सितंबर को होने जा रहा है 13th BRICS Summit, PM नरेंद्र मोदी करेंगे अध्यक्षता, चीन भी होगा शामिल

भारत ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) की अध्यक्षता तीसरी बार करेगा। इससे पहले भारत 2012 और 2016 में भी ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता कर चुका है।

चीन की चाइल्ड पॉलिसी में बड़ा बदलाव, अब कपल दो नहीं तीन बच्चे कर सकेंगे पैदा

एक बार फिर चीन के कानून में फिर से कुछ बदलाव हुए है। राष्ट्रीय विधायिका ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा लाई गई तीन बच्चों की नीति का शुक्रवार को औपचारिक रूप से समर्थन किया।

शी की यात्रा पर भारत की चुप्पी!

चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने तिब्बत की यात्रा की। वे दो दिन तिब्बत में रहे। राजधानी ल्हासा के अलावा वे अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे न्यांगची भी गए।

शी जिनपिंग का तिब्बती दौरा, चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर बना रहा विश्व का सबसे बड़ा बांध

शी जिनपिंग का तिब्बती दौरा, चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर बना रहा विश्व का सबसे बड़ा बांध

चीन का घमंड राक्षसी, चेते दुनिया!

चीन इक्कीसवीं सदी का नंबर एक खतरा है और इस बात को खुद राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने जगजाहिर किया है। उन्होंने खम ठोक दुनिया से कहा है कि 21वीं सदी हमारी है। मतलब जो चीन चाहेगा उसे दुनिया को मानना होगा। चीन अपने माफिक दुनिया बनाएगा। चीन अब अपने को पृथ्वी का केंद्र बिंदु मानता है। इतिहास में जैसे चीन के बादशाह अपने साम्राज्य को मिडिल किंगडम समझते थे और दुनिया को मातहत, वहीं घमंड अब चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में है। तभी स्थापना के सौ साल पर उसका दुनिया में ढिंढोरा है कि उसने वह स्वर्ग बनाया है, जो दुनिया में कहीं नहीं बना। निश्चित ही चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और उसके नेताओं व चीनी लोगों के लिए गर्व की बात है कि चीन अब विकसित है। दुनिया की औद्योगिक फैक्टरी है। महाशक्ति देश है और लोग काफी हद तक खुशहाल। बावजूद इसके वह न स्वर्ग है और न मानवता की अनुकरणीय विकास यात्रा। उलटे पृथ्वी के पौने आठ अरब लोगों में से 19 प्रतिशत (कोई 145 करोड़ लोग) चीनियों को कम्युनिस्ट पार्टी ने ऐसी मशीनों, ऐसे रोबोट में कनवर्ट किया है, जो गुलाम माफिक काम करते हैं और पिंजरों में रहते हैं। चीन की सोने की लंका असलियत में राक्षसी… Continue reading चीन का घमंड राक्षसी, चेते दुनिया!

चीन बढ़ाएगा अपनी सैन्य ताकत

china increase military strength : बीजिंग। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीसी की स्थापना के एक सौ साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर चीन सरकार और सत्तारूढ़ कम्युनिस्टा पार्टी इसका जश्न मना रहे हैं। ऐसा ही एक समारोह गुरुवार को हुआ। इसमें राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने भाषण दिया। उन्होंने दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराते हुए कहा- मैं शपथ लेता हूं कि चीन की सैन्य ताकत को और बढ़ाया जाएगा। हमारी मिलिट्री को हम वर्ल्ड क्लास बनाएंगे। उन्होंने कहा कि वो दौर अब हमेशा के लिए जा चुका है, जब कोई भी देश चीन को धमकाकर चला जाता था। Rajasthan के लाल ने गोली लगने पर भी नहीं हारी हिम्मत, सेना ने मार गिराए Lashkar कमांडर समेत दो आतंकी चीनी राष्ट्रपति ने फेमस थियेनआनमन चौक में लगे माओत्से तुंग की फोटो के सामने खड़े होकर भाषण दिया। जिनफिंग ने अपने भाषण चीन का सम्मान और वहां लोगों की आय बढ़ाने का श्रेय भी कम्युनिस्ट पार्टी को दिया। जिनफिंग माओ स्टाइल की जैकेट पहनी थी। उन्होंने कार्यक्रम में शपथ ली कि चीन वर्ल्ड क्लास मिलिट्री बनाने की अपनी रणनीति को आगे बढ़ाता रहेगा। कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना 1921 में कोई 50 लोगों ने की थी। सीपीसी के मुताबिक… Continue reading चीन बढ़ाएगा अपनी सैन्य ताकत

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सौ साल : chinese communist party 100 Years

chinese communist party 100 years : चीन की कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीसी की स्थापना की तारीख को लेकर कुछ संशय है। कई इतिहासकार मानते हैं कि जुलाई 1921 के मध्य में शंघाई में पार्टी की स्थापना हुई थी और इसका पहला सम्मेलन हुआ था। लेकिन चूंकि पार्टी खुद एक जुलाई को स्थापना दिवस मनाती है इसलिए आधिकारिक रूप से एक जुलाई 2021 को इसकी स्थापना के एक सौ साल हो गए। एक सौ साल के मौके पर सीपीसी का सम्मेलन थियेनआनमन चौक पर किया गया। यह बात अपने आप इस पार्टी के बारे में बहुत कुछ स्पष्ट कर देती है। थियेनआनमन चौक दुनिया के लिए चीन के राष्ट्रीय शर्म का प्रतीक है वहां चीन की सरकारी पार्टी ने अपनी स्थापना के सौ साल का जश्न मनाया। इस तरह उसने पहले कई बार स्पष्ट की जा चुकी धारणा को और स्पष्ट कर दिया कि उसके लिए दुनिया की सोच मायने नहीं रखती है और न उसे लोकतंत्र बहाली की मांग कर रहे युवाओं पर टैंक चलवा कर 10 हजार लोगों को मार डालना कोई शर्म की बात है। यह भी पढ़ें: कर्ज लेकर काम चलाएं! दुनिया को इसी नजरिए से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को देखना चाहिए। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी… Continue reading चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सौ साल : chinese communist party 100 Years

सौ साल में चीन कितना बदला?

communist party of china : चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को बने आज सौ साल पूरे हुए। अपने लगभग 9 करोड़ सदस्यों के साथ वह वास्तव में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है और सबसे शक्तिशाली पार्टी है। हमारी भाजपा अपने 12 करोड़ सदस्यों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करती है लेकिन उसके नेताओं को पता है कि जिस दिन उनके नीचे से कुर्सी खिसकी, ये 12 के 2 करोड़ों को भी बचाना मुश्किल हो जाएगा। इस साल चीनी पार्टी की सदस्यता के लिए 2 करोड़ अर्जियां आईं लेकिन उनमें से सिर्फ 20 लाख को ही सदस्यता मिली। इसके अलावा इस पार्टी की खूबी यह है कि पिछले 72 साल से यह लगातार सत्ता में है। यह एक दिन भी सत्ता से बाहर नहीं रही। चीन में इसने किसी अन्य पार्टी को कभी पनपने नहीं दिया। इस पार्टी में 1921 से लेकर अब तक आतंरिक सत्ता-संघर्ष कभी-कभी हुआ, वरना इसका नेता पार्टी, सरकार और फौज— इन तीनों को हमेशा अपने कब्जे में रखता रहा। यह भी पढ़ें: हिंदुआना हरकतः हिंदुआना आदत 1917 में रुस में हुई कम्युनिस्ट क्रांति से प्रेरित होकर चार साल बाद 1921 में दो चीनी बुद्धिजीवियो— चेन दूश्यू और ली दझाओ ने शांघाई में… Continue reading सौ साल में चीन कितना बदला?

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