दक्षिण में भाजपा मूर्तिया लगा कर वोट लेगी?

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में बेंगलूरू के टर्मिनल दो हवाई अड्डे पर नादप्रभु कैंपेगौड़ा की 108 फीट की मूर्ति का उद्घाटन किया। दुनिया भर में लगी सबसे उंची तांबे की मूर्ति हैं।

पहले बेटरी का खनिज तो जुटाए, फिर इलेक्ट्रीक वाहन की सोचे!

हमारा देश गजब है। कई बार जहां जल्दबाजी में कुछ ऐसे फैसले ले लिए जाते हैं कि जिन पर फिर अमल कर पाना मुश्किल होता है। आमतौर पर सरकार के ज्यादातर फैसले आम आदमी को परेशान करने वाले ही होते हैं।

लकड़ी के लंबे खंबे, कनाड़ा-अमेरिका के शिलालेख!

कनाडा में आप कहीं भी घूमन  जाएं तो समुद्र किनारों से लेकर बड़े पार्क, मछलीघरों, कनाट प्लेस सरीखी जगहों पर बड़े—बड़े पेड़ों के खंबे लगे होते हैं जो कि 10-15 फुट ऊँचे आकार के होते हैं।

जींस की कहानी दिलचस्प

उन दिनों अमरीका व कनाडा में सोने की तलाश में लोग आए थे।  सोने की खोज में आने वाले लोगों के लिए लेविस ने पहले तो टेंट बनाना शुरु किया।

मुकेश, मांगा पासी और चौधरी की खैरात

करीब 68-70 साल के मांगा पासी से मैंने पहली मुलाकात में पूछा था कि आपका नाम कुछ अजीब सा लगता हैं।

जमशेद ईरानी पर नहीं लिखा तो बैचेन रहूंगा!

उन्होंने अपनी योग्यता से ऐसा इस्पात तैयार किया जो कि भारत का ही नहीं बल्कि विश्व का सबसे बेहतर और सस्ता इस्पात था।

कुछ भी हो टाटा की बात अलग है!

टाटा समूह के एक आला अधिकारी जमशेदजी ईरानी के निधन की जब खबर सुनी तो कुछ पुरानी यादे ताजा हो गई।

महाठग और उसके हवाले राजनीति

सुकेश नामक इस ठग का जन्म दिसंबर 1979 को बेंगलुरु के भवानी नगर इलाके में हुआ। दिल्ली की तिहाड़ जेल में धोखाधड़ी के आरोप में यह बंद है।

सिख मेहनत के बूते कनाडा में हिट

अंग्रेज मुंह से भले ही कुछ न कहते हों मगर जिस संपत्ति के वे लोग मालिक हुआ करते थे आज उनके विशाल घरों व फार्म हाउस को सिख ही खरीद रहे हैं।

कनाडा में सिख बोलबाले के कई आयाम

अब हालत बहुत बदल गए हैं। यदि आप कनाडा में वेंकूवर के सरे इलाके में जाए तो आपको अंग्रेजी में बात करने की जरुरत नहीं होगी। देख कर ऐसा लगता है कि जैसे कि आप दिल्ली के तिलक नगर में आ गए हो

कनाडा का मतलब और उसमें भारतीय

मैंने अपनी कनाडा यात्रा के बारे में लिखना तो शुरु कर दिया पर पाठकों को इस देश के बारे में यह नहीं बताया कि वह कहां है। अतः इस बारे में थोड़ी बहुत जानकारी देने की कोशिश कर रहा हूं।

हमें क्या फायदा?

यूक्रेन युद्ध का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था ऋषि सुनक के ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बनने का मुद्दा अखबार, टेलीविजन से लेकर हर एशियाई की जुबान पर चढ़ा हुआ है।

छोटी-छोटी बातों पर दौडता दिमाग!

भारत में तो बाल्टी में पानी भरकर मग से नहाते थे पर कनाडा में न तो किसी के यहां बाल्टी देखी और न ही मग नजर आया।

वे लोग, वह देश कैसा और हम कैसे?

जब कौन बनेगा करोड़पति देख रहा था तो एक सवाल पर मैंने कुतुब मीनार का चित्र देखकर सोचा कि मैंने तो दिल्ली भी ठीक से नहीं घूमा है।

विदेश में हम शाकाहारी और रेस्तरां

अब लगता है भला हो मद्रासियों का जिन्होंने देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के हर कोने में शाकाहारी भोजन बेचने वाले रेस्तरां खोले हैं।

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