अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते सोने में मार्च में 17 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है और इस दौरान कीमती घातु करीब 14.5 प्रतिशत सस्ती हो गई है।
इससे पहले सोने में इतनी बड़ी गिरावट करीब 17 वर्ष पहले देखी गई थी, जब अक्टूबर 2008 में सोने का दाम करीब 16.8 प्रतिशत कम हो गया है।
मौजूदा समय में कॉमेक्स पर सोना 4,600 डॉलर प्रति औंस के आसपास है, जो कि इस महीने की शुरुआत में सोना 5,400 डॉलर प्रति औंस के आसपास था।
जानकारों का कहना है कि सोने में आई तेज गिरावट की वजह मुनाफावसूली, डॉलर इंडेक्स में तेजी आना, बॉन्ड यील्ड का बढ़ना और कच्चे तेल जैसी अन्य कमोडिटी में तेजी आना था। इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर सोने पर दबाव बनाने का काम किया।
जानकारों ने आगे बताया कि पिछले चार वर्षों में सोने के व्यापार का तरीका बदल गया है।
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उन्होंने कहा यूक्रेन युद्ध से पहले, सोने की कीमत बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर के विपरीत होती थी; यानी जब ये सूचकांक गिरते थे तो सोने की कीमत बढ़ती थी, और जब ये सूचकांक बढ़ते थे तो सोने की कीमत गिरती थी।
उन्होंने आगे कहा यूक्रेन युद्ध के बाद की अवधि ने इन संबंधों को पूरी तरह से उलट दिया, विशेष रूप से 2025 और 2026 की शुरुआत में जब सोने की कीमत में बहुत तेजी से वृद्धि हुई थी।
ईरान युद्ध के बाद, सोने ने अपने अधिक पारंपरिक संबंधों को फिर से अपना लिया है।
उन्होंने कहा बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर दोनों में वृद्धि हुई है, तब सोने ने इन मापदंडों के प्रति अपनी पारंपरिक विपरीत संवेदनशीलता प्रदर्शित की है, जिसके परिणामस्वरूप इसकी कीमत में गिरावट आई है।
हालांकि, बीते एक साल में सोने में रिकॉर्ड रैली देखने को मिली है। डॉलर में सोने का दाम बीते एक साल में 45 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुका है। वहीं, छह महीने में सोने में करीब 18 प्रतिशत की तेजी देखी गई है।
Pic Credit : ANI
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