• संघ परिवारः मुस्लिम मोह में गिरफ्तार

    नजारा घातक राजनीति है। सभी सूफी इस्लामी माँगे रखते हैं। उस ‘वर्ल्ड सूफी फोरम’ ने आतंकवाद विरोध के नाम पर दिल्ली सम्मेलन किया जिस में भाजपा महाप्रभु गये थे। पर उस की माँगे यह थीं - मुसलमानों के खिलाफ हुई ‘ऐतिहासिक गलतियाँ’ सुधारें; अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्जा दें; केंद्रीय सूफी संस्थान बनाएं, तथा उस की शाखाएं खोलें; सूफी विश्वविद्यालय बनाएं; ‘सूफी कॉरिडोर’ बना कर सभी सूफी केंद्रों को जोड़ें, आदि। उन में से कई माँगें पूरी हो चुकी हैं। खुद भाजपा मंत्री और पदाधिकारी गर्व से बताते रहते हैं!  आगामी मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए...

  • धर्म नीचे, मूर्ति ऊपर!

    संघ-भाजपाई बच्चों से भी हल्का व्यवहार करते हैं। बच्चे तो शिक्षक की भावना समझ लेते हैं, किन्तु संघ-परिवार के नेतागण दशकों बाद भी संवेदनहीन हैं। पीढ़ियों, नेताओं के बदलने पर भी उन में कुछ नहीं बदलता। वे राजनीतिक तिकड़मों के बाद भावनाओं, लफ्फाजी, और तमाशों के सिवा किसी चीज को महत्व नहीं देते।....सच यह है कि आगे हिन्दू समाज बचेगा भी या नहीं, वे इस से बेपरवाह हैं। अपने कथित ‘राष्ट्रवाद’ के लिए उन की एक ही लालसा है, कि उन के दल, संगठन, और नेताओं का नाम जैसे भी ऊपर रहे। मानो किसी नीम-हकीम की लालसा हो कि मरीज...

  • भाजपा बनाम इन्डिया: गलती कहाँ?

    भारत का इन्डिया नाम लगभग ढाई हजार वर्ष से चला आ रहा है। इस नाम के उद्भव और प्रयोग का अंग्रेजी राज से कोई लेना-देना ही नहीं है। ….सोचना चाहिए कि हमारे तमाम राजनीतिक दलों में असली बुद्धू कौन है? कथित पप्पू, या खुद को तीसमार खाँ समझने और अपने मुँह-मियाँ मिट्ठू बनने वाले संघ-परिवार-भाजपा नेता? केवल कुर्सी पर होना बुद्धिमत्ता का प्रमाण नहीं, जो विविध संयोग दुर्योग से भी होता है। इक्कीस वर्ष पहले गोवा में लालकृष्ण अडवाणी केवल चुप रह गए होते तो आज कुर्सीनशीन कोई और होते। भारत में अधिकांश हिन्दू राष्ट्रवादी, विशेषकर संघ-परिवार के नेता और...

  • ‘कठुआ वाली लड़की’: गजवा-ए-हिन्द का नया अध्याय

    मधु किश्वर की पुस्तक ‘द गर्ल फ्रॉम कठुआ: ए सैक्रिफिशल विक्टिम ऑफ गजवा-ए-हिन्द’ (2023: गरुड़ प्रकाशन) एक भयावह पुस्तक है। खोजी पत्रकारिता तथा शोध-विश्लेषण से भरा 641 पृष्ठों का यह ग्रंथ चकित करता और डराता है। बहुतों को इसे पढ़कर काफ्का की प्रसिद्ध पुस्तक ‘द ट्रायल’ की याद आ सकती है, जिस के सज्जन पात्र जोसेफ को पूर्णतः निरपराध होते हुए भी बाकायदा कानूनी प्रक्रिया द्वारा मृत्युदंड दे दिया जाता है। उस से भी अधिक अविश्वसनीय ‘कठुआ वाली लड़की’ की घटना है। जनवरी 2018 में जम्मू के रसाना गाँव में एक मुस्लिम बालिका की लाश निकट जंगल में मिलती है।...