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Editorial

एकाधिकार पर प्रहार

ByNI Editorial,
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यह सिर्फ संयोग नहीं है कि ईयू में जांच का एलान उसी समय हुआ है, जब अमेरिका सरकार ने एपल के खिलाफ मोनोपॉली विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज कराया है। आरोप है कि एपल स्मार्टफोन बाजार पर अपने प्रभुत्व का दुरुपयोग कर रही है।

यूरोपीय संघ ने बड़ी टेक कंपनियों- एपल, गूगल और मेटा के खिलाफ जांच शुरू करने का एलान किया है। इन कंपनियों पर आरोप है कि वे यूरोपीय संघ के हाल में पारित डिजिटल मार्केटिंग ऐक्ट का उल्लंघन कर रही हैं। इस कानून का मकसद डिजिटल बाजार को अधिक निष्पक्ष एवं प्रतिस्पर्धा योग्य बनाना है। ये तीनों दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल हैं, जिनको लेकर वर्षों से शिकायत है कि उन्होंने डिजिटल बाजार पर एकाधिकार कायम कर लिया है।

यह सिर्फ एक संयोग नहीं है कि यूरोपियन यूनियन में जांच का एलान उसी समय किया गया है, जब अमेरिका सरकार ने एपल के खिलाफ एंटी-ट्रस्ट (मोनोपॉली विरोधी) कानून के तहत मामला दर्ज कराया है। अमेरिका के न्याय मंत्रालय ने यह कदम पिछले हफ्ते उठाया। मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि एपल कंपनी स्मार्टफोन बाजार पर अपने प्रभुत्व का दुरुपयोग कर रही है।

वह इस बाजार में दूसरी कंपनियों के अस्तित्व को लगातार कठिन बनाती जा रही है। वह निर्माता कंपनियों (डेवलपर्स) से ऊंचा शुल्क वसूलती है और ऐसी तकनीकी रुकावटें डालती है, जिससे गैर-एपल स्मार्टफोन उपकरणों के साथ एपल हैंटसेट्ल की संवाद गुणवत्ता घट जाती है।

दो विकसित बाजारों में शुरू हुई इन कार्रवाइयों में भारत के लिए खास सबक छिपा है, जहां सरकार अर्थव्यवस्था पर “नेशनल चैम्पियंस” की पकड़ को मजबूत बनाने की नीति पर बेहिचक आगे बढ़ रही है। यहां गौरतलब है कि एपल, गूगल, अमेजन, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कोई नेशनल चैंपियन कंपनी अपने देश में नहीं है, जो आविष्कार और बाजार में कुछ नया करने के अपने रिकॉर्ड से आगे बढ़ी हो। इन पांचों कंपनियों का साझा मूल्य 10.5 ट्रिलियन डॉलर- यानी भारत के जीडीपी से तीन गुना ज्यादा है।

फिर भी वहां यह महसूस किया गया है कि एकाधिकार आम उपभोक्ता के साथ-साथ अर्थव्यवस्था की गतिशीलता के लिए भी हानिकारक होता है। इसलिए एपल जैसे नेशनल चैंपियन तक भी अब कानून के हाथ पहुंच गए हैं। ढाई दशक पहले माइक्रोसॉफ्ट को ऐसी ही कार्रवाई के जरिए दो भागों में बांट दिया गया था। मगर फिलहाल भारत उलटी दिशा में चल रहा है, जबकि उनके दुष्परिणाम सबके सामने हैं।

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