राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

साइबर सुरक्षा में सेंध

electoral bonds

ताजा घटनाएं न केवल संबंधित संस्थाओं की लापरवाही का संकेत हैं, बल्कि यह भी बताती हैं कि डिजिटल कारोबार के विस्तार के साथ-साथ सुरक्षा के मानकों को मजबूत करने के पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैँ।

साइबर सुरक्षा से जुड़ी दो गंभीर घटनाओं ने उचित ही भारत में चिंता बढ़ा दी है। जब देश के सबसे बड़े बैंक (भारतीय स्टेट बैंक) के ग्राहकों का डेटा डार्क वेब पर लीक हो जाए, और दूसरी ओर बेंगलुरु की प्रमाणन कंपनी ई-मुद्रा के जारी डिजिटल प्रमाणपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामी उजागर हो, उसे साधारण मामला नहीं माना जा सकता। दरअसल, ये घटनाएं न केवल संबंधित संस्थाओं की लापरवाही का संकेत हैं, बल्कि यह भी बताती हैं कि डिजिटल कारोबार के विस्तार के साथ-साथ सुरक्षा के मानकों को मजबूत करने के पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैँ। एसबीआई का डेटा लीक बैंक के ग्राहकों के भरोसे पर सीधा प्रहार है। बैंक ने 3,897 ग्राहकों के रिकॉर्ड डार्क वेब पर पाए जाने की पुष्टि की है, जिनमें नाम, मोबाइल नंबर, जन्म तिथि और पते जैसी संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं।

आपत्तिजनक यह है कि बैंक को इस संबंध में 16 अक्टूबर को जानकारी मिली, जिसके पांच दिन बाद उसने शेयर बाजार को इसकी सूचना दी, जबकि प्रभावित ग्राहकों को तब तक कोई संदेश नहीं भेजा गया। यह बताता है कि कैसे आज संस्थाएं निवेशकों के हितों को तो प्राथमिकता देती हैं, लेकिन आम उपभोक्ता की सुरक्षा और सूचना के अधिकार को गंभीरता से नहीं लेतीं। दूसरी घटना तकनीकी दृष्टि से और भी गंभीर है। ई-मुद्रा के आठ डिजिटल प्रमाणपत्रों की निजी कुंजियां इतनी कमजोर थीं कि उन्हें सेकंडों में तोड़ा डाला गया। उसके बाद हैकर किसी भी वेबसाइट का “प्रमाण पत्र” देने का दावा करने की स्थिति में आ गए। स्पष्टतः इस घटना ने देश की प्रमाणन प्रणाली की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि भारत की साइबर सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। सरकार और नियामक संस्थाओं को चाहिए कि वे डेटा सुरक्षा कानूनों को सख्ती से लागू करें और इस संबंध पारदर्शिता भी सुनिश्चित करें, ताकि साइबर सुरक्षा में आम जन का भरोसा बहाल हो सके। डिजिटल विश्वास केवल सुरक्षा के मजबूत तंत्र से ही स्थापित हो सकता है, जिसके बिना कोई देश अपने उज्ज्वल डिजिटल भविष्य की आशा नहीं संजो सकता।

By NI Editorial

The Nayaindia editorial desk offers a platform for thought-provoking opinions, featuring news and articles rooted in the unique perspectives of its authors.

Leave a comment