बिहार में भाजपा के नेतृत्व में पहली बार बनी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा अब तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दिल्ली में भाजपा के बड़े नेताओं से मुलाकात करने के बाद पटना में पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से भेंट की है।
इसके बाद यह तय माना जा रहा है कि जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया जाएगा। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के समय जदयू कोटे से दो उप मुख्यमंत्री बनाए गए थे।
पिछली सरकार में भाजपा के दो उप मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री थे, जबकि जदयू के खाते में मुख्यमंत्री सहित नौ मंत्री थे। इसके अलावा लोजपा (रामविलास) के दो और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के एक-एक मंत्री शामिल थे। इधर, बताया जाता है कि जदयू अपने कोटे में मंत्रियों की संख्या बढ़ाने का दबाव बना रही है।
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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार की हालिया मुलाकात को इसी संदर्भ से जोड़ा भी जा रहा है। हालांकि एनडीए में मंत्रियों को लेकर कोई तनातनी हो इसकी संभावना नहीं के बराबर है। इधर, सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा और जदयू के नए चेहरों को जगह मिलना तय है, जिससे कई पुराने मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 24 अप्रैल को बहुमत साबित करेंगे। जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद मई की शुरुआत में बिहार मंत्रिमंडल विस्तार होने की पूरी संभावना है। पिछली सरकार के संतुलन को बरकरार रखते हुए भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो के बीच पदों का बंटवारा लगभग तय है।
हालांकि इस बार कई पुराने नामों की जगह नए चेहरों को मौका मिलना निश्चित माना जा रहा है। हालांकि छोटे दलों में मंत्रिमंडल में चेहरा बदलने की उम्मीद नहीं के बराबर है। ऐसे में लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की निगाह मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी हुई हैं।
Pic Credit : ANI
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