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वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल अध्ययन में भारतीय शोधकर्ता आगे

ByNI Desk,
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Indian Researchers

नई दिल्ली। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के शोधकर्ता और डॉक्टर स्वास्थ्य देखभाल अध्ययन में दुनिया में अग्रणी हैं। क्यूरियस के संस्थापक प्रोफेसर जॉन एडलर (John Adler) और स्प्रिंगर नेचर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एमडी वेंकटेश सर्वसिद्धि ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में आईएएनएस से कहा, 372 अरब डॉलर के बाजार के साथ भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र दुनिया भर में सबसे बड़े बाजारों में से एक है और देश में होने वाले शोध और नवाचार के साथ इसके और भी आगे बढ़ने की उम्मीद है। Indian Researchers

क्यूरियस इंडिया मेडिकल साइंस एंड पब्लिशिंग सिम्पोजियम: इनोवेटिंग फॉर टुमॉरो में जॉन एडलर ने कहा, “भारत में चल रहे शोधों से पता चलता है कि यहां चिकित्सा का भविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यहां स्वास्थ्य सेवा (Health Care) में एक नई क्रांति हो रही है, खासकर कम लागत वाली स्वास्थ्य सेवा, जिसे बाकी दुनिया को सीखने की जरूरत है और क्यूरियस उन कहानियों को बताने का माध्यम है।

गौरतलब है कि क्यूरियस एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म है, जो दुनिया भर में चिकित्सा ज्ञान को शेयर करने और बढ़ावा देने के लिए क्राउडसोर्सिंग का उपयोग करता है। स्प्रिंगर नेचर इंडिया के एमडी वेंकटेश सर्वसिद्धि ने बताया कि युवा शोधकर्ताओं और डॉक्टरों को अधिक शोध प्रकाशित करने के लिए सशक्त बनाना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा अगर मैं अपने वैश्विक आंकड़ों पर गौर करूं तो हमारे मंच पर हर साल 18 हजार लेख प्रकाशित होते हैं और 4 हजार से अधिक लेख अकेले भारत से आते हैं, जो भारतीय शोधकर्ताओं और डॉक्टरों के लेखों का 20 से 23 प्रतिशत के करीब है। अपने हालिया जी 20 संबोधन के दौरान, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया (Mansukh Mandaviya) ने भी स्वास्थ्य देखभाल उन्नति में अनुसंधान और विकास के महत्व पर प्रकाश डाला था।

उन्होंने इस क्षेत्र में एक नए वातावरण को बढ़ावा देने के भारत के प्रयासों का उल्लेख किया। जॉन ने कहा भारत न केवल आज चिकित्सा के क्षेत्र में एक पावरहाउस है, बल्कि आने वाले दशकों में यह और भी ताकतवर होने जा रहा है। चिकित्सा के सभी क्षेत्रों में बहुत सारे नवाचार हो रहे हैं। यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता है कि अगली बड़ी सफलता कहां मिलेगी। जरूरी नहीं कि यह दुनिया के बड़े अस्पताल हों। यह अक्सर बहुत ही साधारण स्थान हो सकते हैं।

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