नई दिल्ली। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो कर रहे हैं वह अपनी जगह है लेकिन यूरोपीय देश जो कर रहे हैं उससे पूरा मुद्दा मजाक में तब्दील हो रहा है। ग्रीनलैंड पर कब्जे की ट्रंप की धमकियों के बीच यूरोप ने जो ‘सैन्य एकजुटता’ दिखाई है उसमें कुल 40 सैनिक ग्रीनलैंड पहुंचे हैं। ग्रीनलैंड की सुरक्षा के नाम पर ब्रिटेन ने सिर्फ एक सैनिक भेजा है, जबकि सात यूरोपीय देशों के करीब 40 सैनिक राजधानी नुउक पहुंचे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया की की रिपोर्ट के मुताबिक डेनमार्क, नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड्स और ब्रिटेन जैसे नाटो देशों ने मिलकर ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस नाम से साझा सैन्य अभियान शुरू किया है। ये सैनिक इसी में शामिल होने पहुंचे हैं। इस पूरे सैन्य अभ्यास पर सवाल उठाते हुए इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेत्तो ने इसे एक मजाक करार दिया है।
गौरतलब है कि डेनमार्क पहले से ग्रीनलैंड में करीब दो सौ सैनिक तैनात किए हुए है। इसके अलावा 14 सदस्यीय सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल भी वहां मौजूद है, जो आर्कटिक इलाकों में गश्त करते हैं। इस बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि आने वाले दिनों में इन्हें जमीन, हवा और समुद्र के जरिए और मजबूत किया जाएगा। यह संख्या छोटी है, लेकिन यह राजनीतिक संदेश देने के लिए है कि नाटो एकजुट है। असल में डेनमार्क की अगुवाई में चल रहा ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस एक सैन्य अभ्यास है। इसका मकसद यह देखना है कि अगर भविष्य में ग्रीनलैंड में बड़ी संख्या में सैनिक तैनात करने पड़े, तो उसकी तैयारी कैसी होगी।


