राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

सबरीमाला मामले में कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली। केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिला के प्रवेश की इजाजत देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर 50 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। बुधवार को लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। दूसरे दिन की सुनवाई में अदालत ने कुछ गंभीर सवाल उठाए। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि जो लोग भगवान अयप्पा के भक्त नहीं हैं, वे केरल के सबरीमाला मंदिर की परंपराओं को कैसे चुनौती दे सकते हैं?

असल में सर्वोच्च अदालत ने धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे पर सात सवाल तय किए हैं। इनमें से एक सवाल यह है कि क्या कोई व्यक्ति, जो किसी धार्मिक संप्रदाय या समूह से संबंधित नहीं है, उस धार्मिक संप्रदाय या समूह की किसी प्रथा को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दे सकता है। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि सबरीमाला मामले में याचिकाकर्ता कौन थे?

जस्टिस नागरत्ना ने पूछा, ‘मूल याचिकाकर्ता भक्त नहीं थे। किसी भी भक्त ने इस प्रथा को चुनौती देने के लिए अदालत का रुख नहीं किया। तो फिर ये रिट याचिकाकर्ता कौन हैं जो इसे चुनौती दे रहे हैं’। मेहता ने इसके जवाब में कहा कि मूल याचिकाकर्ता ‘इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन’ नामक वकीलों का एक संगठन है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ‘वे भक्त नहीं हैं। लेकिन हमें यह स्पष्ट करना होगा। क्या भगवान अयप्पा का कोई भी भक्त इस परंपरा को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर कर सकता है और यदि कोई गैर भक्त, जिसका उस मंदिर से कोई संबंध नहीं है, इसे चुनौती देता है, तो क्या यह अदालत ऐसी याचिका पर सुनवाई कर सकती है’?

सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘कोई सेकुलर अदालत किसी धार्मिक प्रथा को सिर्फ अंधविश्वास नहीं कह सकती, क्योंकि उसके पास ऐसा तय करने की विशेषज्ञता नहीं होती’। उन्होंने कहा, ‘जो चीज नगालैंड के किसी समुदाय के लिए धार्मिक हो सकती है, वही मेरे लिए अंधविश्वास लग सकती है। हमारा समाज विविधतापूर्ण है, यहां अलग-अलग लोग, धर्म और मान्यताएं हैं। ऐसे में अदालत के लिए ऐसा फैसला खतरनाक हो सकता है’। इस  पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला महिलाओं के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के संतुलन से जुड़ा है। कोर्ट ने सती प्रथा, जादू टोना और नरबलि के उदाहरण दिए और कहा कि अगर कोई प्रथा समाज को झकझोरती है, तो अदालत हस्तक्षेप कर सकती है।

By NI Desk

Under the visionary leadership of Harishankar Vyas, Shruti Vyas, and Ajit Dwivedi, the Nayaindia desk brings together a dynamic team dedicated to reporting on social and political issues worldwide.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

eleven − four =