नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा आमने सामने हैं लेकिन असली लड़ाई तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग में चल रही है। चुनाव आयोग ने बुधवार को वह किया, जो इससे पहले किसी संवैधानिक संस्था ने नहीं किया होगा। आयोग ने सीधे नाम लेकर तृणमूल कांग्रेस को चेतावनी दी। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बाद आयोग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, ‘चुनाव आयोग की तृणमूल कांग्रेस को दो टूक, पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव: भय रहित, हिंसा रहित, धमकी रहित, प्रलोभन रहित, छापा रहित, बूथ एंव सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे’।
इससे पहले बुधवार को तृणमूल के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलने पहुंचा। डेरेक ने बैठक के बाद बताया, ‘हमने एसआईआर के मुद्दे पर समय मांगा था, लेकिन मीटिंग के दौरान हमारे साथ खराब व्यवहार किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने हमें सिर्फ पांच मिनट में भगा दिया’। डेरेक ने कहा कि बैठक सुबह 10:02 बजे शुरू हुई और 10:07 बजे खत्म हो गई। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने सूत्रों के हवाले से मीडिया को बताया कि डेरेक ओ’ब्रायन ने मुख्य चुनाव को बोलने से रोका और धमकी दी। वह कोई बात सुन ही नहीं रहे थे।
विपक्षी पार्टियों ने बुधवार की शाम को इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, राजद, आप, डीएमके, एनसीपी आदि के नेता मौजूद रहे। इसमें डेरेक ने कहा, ‘मैं 22 वर्षों से तृणमूल कांग्रेस में हूं, 16 वर्षों से संसद में हूं, और हमने कई संवैधानिक पदाधिकारियों से मुलाकात की है। आज जो देखा, वह शर्मनाक है। मैं चुनाव आयुक्त को चुनौती देता हूं। अगर उनके पास वीडियो है तो जारी करें। अगर वीडियो नहीं है, तो ऑडियो जारी करें’। डेरेक का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने तृणमूल के प्रतिनिधिमंडल को ‘गेट लॉस्ट’ कहा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी पार्टियों ने कहा कि संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के प्रस्ताव का नोटिस शुरुआती चरण में ही खारिज करना पूरी संवैधानिक प्रक्रिया को खत्म करता है। इससे जवाबदेही कमजोर होती है। लोकतंत्र प्रभावित होता है। गौरतलब है कि विपक्षी पार्टियों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव रखा था। इसे एक ही साथ दोनों सदनों में खारिज कर दिया गया।


