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सुरंग में फंसे हैं सैकड़ों लोग

नई दिल्ली। नेपाल में अचानक आई बाढ़ के पांच दिन बाद भी राहत व बचाव कार्य में ज्यादा सफलता नहीं मिल पाई है। अब तक मरने वालों की संख्या आठ सौ से ज्यादा हो गई है तो लापता लोगों की संख्या भी ढाई हजार से ऊपर है। पनबिजली परियोजनाओं में काम करने वाले करीब नौ सौ लोग अलग अलग सुरंगों में फंसे हैं, जिन्हें निकालने का काम चल रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पनबिजली परियोजनाओं के 898 कर्मचारी सुरंगों में फंसे हैं, जबकि 361 कर्मचारियों को अब तक बचाया जा चुका है।

रविवार को खबर आई कि त्रिशूली-3ए पनबिजली परियोजना की सुरंग में चल रहे बचाव अभियान में कुछ कामयाबी मिली। बचावकर्मी मशीनों की मदद से मिट्टी और गाद हटा रहे हैं। सुरंग में छह इंच का छेद कर पाइप के जरिए हवा पहुंचाई जा रही है। विशेषज्ञों की टीम यह काम कर रही है और कहा जा रहा है कि इस छह इंच के छेड़ को बड़ा कर वहां से रास्ता बनाने की तैयारी है, ताकि बचाव दल सुरंग के अंदर जाकर लोगों की तलाश कर सके। हालांकि पक्के तौर पर यह पता नहीं है कि सुरंग में फंसे कितने लोग जीवित हैं।

गौरतलब है कि बुधवार, 26 अगस्त को ग्लेशियर पिघलने से बनी झील टूट जाने से नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी। इस आपदा में नेपाल में अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है। हालांकि तिब्बत से ज्यादा जानकारी नहीं मिल रही है क्योंकि चीन जानकारी छिपा रहा है। बताया जा रहा है कि उधर भी जानमाल का काफी नुकसान हुआ है।

इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के अभियान को लेकर रविवार को शाम साढ़े पांच बजे तक का अपडेट जारी किया। अब तक 149 भारतीयों को बचाया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बचाए गए 149 भारतीयों के नाम की एक सूची सोशल मीडिया पर शेयर की।

उधर नेपाल के लिए अच्छी खबर यह है कि नेपाल और चीन की सीमा के पास बाढ़ के बाद बनी झील का ज्यादातर पानी प्राकृतिक रास्ते से निकल गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने रविवार को कहा कि इससे निचले इलाकों में अचानक बड़ी बाढ़ आने का खतरा फिलहाल कम हो गया है। गौरतलब है कि यह झील पिछले बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बनी थी। लांगटांग री पर्वत क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया था, जिससे नदी का बहाव रुक गया और वहां पानी जमा होकर झील बन गई। अब वहां का पानी निकल गया है तो नेपाल के निचले हिस्से में फिर अचानक बाढ़ आने का खतरा टल गया है।

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By NI Desk

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