नई दिल्ली। भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। इसके बाद खबर है कि सरकार की ओर से सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों को कहा गया है कि वे अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदने के बारे में विचार करें। अमेरिकी मीडिया समूह ‘ब्लूमबर्ग’ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि अमेरिका के साथ हाल में हुई व्यापार संधि के बाद भारत सरकार ने सरकारी रिफाइनरी कंपनियों से यह अनुरोध किया है।
गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार समझौते की घोषणा के दौरान कहा था कि भारत ने रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद करने का वादा किया है। हालांकि यह बात पूरी तरह से सही नहीं है। भारत ने रूस से तेल खरीदना पूरी तरह से बंद नहीं किया है, बल्कि तेल खरीद कम कर दी है। बहरहाल, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने तेल कंपनियों से कहा है कि जब भी टेंडर के जरिए स्पॉट मार्केट से तेल खरीदें, तो अमेरिकी तेल को प्राथमिकता दें।
बताया जा रहा है कि सरकार ने वेनेजुएला के कच्चे तेल को लेकर भी ऐसा अनुरोध किया है। हालांकि वेनेजुएला का तेल व्यापारियों के साथ प्राइवेट बातचीत से मंगाया जाएगा। इससे पले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि भारत व्यापार समझौते के हिस्से के रूप में रूसी कच्चा तेल लेना बंद करने पर सहमत हो गया है। हालांकि, भारत ने अब तक सार्वजनिक रूप से इस दावे पर सीधा कोई जवाब नहीं दिया है। भारत का कहना रहा है कि वह अपने तेल के स्रोतों में विविधता ला रहा है और देश की ऊर्जा सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
गौरतलब है कि भारत के लिए वेनेजुएला से तेल लाकर उसको रिफाइन करना अपेक्षाकृत मुश्किल काम है। इसका कारण यह है कि यह कच्चा तेल कम सल्फर वाला होता है। इसे प्रोसेस करना भारतीय यूनिट्स के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं है। दूसरी बात यह है कि अमेरिका और वेनेजुएला से दूरी भी ज्यादा है। बहरहाल, हाल में सरकारी कंपनियों जैसे ने वेनेजुएला से करीब 40 लाख बैरल तेल खरीदा है। निकोलस मादुरो सरकार पर अमेरिकी नियंत्रण के बाद अब विटोल और ट्रेफिगुरा जैसी बड़ी कंपनियां वेनेजुएला के तेल की मार्केटिंग कर रही हैं। यह भी खबर है कि भारत की सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी कंपनी रिलायंस ने भी 20 लाख बैरल तेल का सौदा वेनेजुएला से किया है।


