नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के दौरान पिछले 36 दिन में ईरान ने अमेरिका के सात लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। एक अतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि पिछले 23 साल में पहली बार ऐसा हुआ कि किसी जंग में गोलीबारी से अमेरिका का लड़ाकू विमान मार गिराया गया। ईरान ने अमेरिका के एफ-15ई विमान को मार गिराया है, जिसके दो पायलटों में से एक पायलट लापता है और ईरान की सीमा में कहीं है। उसकी तलाश में अमेरिका और ईरान दोनों अभियान चला रहे हैं।
गौरतलब है कि दो अप्रैल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और उनके पास जवाब देने की क्षमता नहीं बची है। ट्रंपने यह भी कहा कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर कब्जा हो चुका है। उनके विमान तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं और ईरान कुछ नहीं कर पा रहा है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ऐसे ही दावे किए।
लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि पिछले दो दिन में अमेरिका के दो सैनिक विमान और सर्च ऑपरेशन में लगे दो ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर ईरान के हमले का शिकार हुए। अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक 23 साल में पहली बार अमेरिकी लड़ाकू विमान दुश्मन की गोलीबारी में गिराए गए। इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान ऐसा हुआ था। एक रिपोर्ट के मुताबिक 36 दिन की जंग में अमेरिका के सात विमान नष्ट हो चुके हैं।
सबसे पहले युद्ध शुरू होने के तीन दिन बाद ही दो मार्च को फ्रेंडली फायरिंग में कुवैत में अमेरिका के तीन एफ-15 विमान गिर गए। हालांकि चालक दल के सभी छह सदस्य सकुशल बाहर आ गए। इसके 10 दिन बाद 12 मार्च को इराक में केसी-135 टैंकर दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें छह अमेरिकी सैनिक मारे गए। इसके बाद 27 मार्च को सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ई-3 सेंट्री नष्ट हुआ। यह अवाक्स सिस्टम से जुड़ा था, जो मिसाइलों पर निगरानी करता था। इसके बाद तीन अप्रैल को एक एफ-15ई और एक ए-10 विमान ईरान ने मार गिराया।
ईरानी हमले में गिरे एफ-15ई विमान के दो पायलटों में से एक पायलट को अमेरिका ने बचा लेने का दावा किया और दूसरा ईरान के क्षेत्र में कहीं गिरा है। ए-10 जहाज के पायलट के बारे में कहा जा रहा है कि वह हमले के बाद कुवैत के हवाई क्षेत्र तक पहुंच गया, जहां पायलट सुरक्षित तरीके से बाहर निकल गया। लापता पायलट की तलाश में दो ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर भेजे गए थे। उन पर भी हमला हुआ। हालांकि, इन पर मौजूद सभी अमेरिकी सैनिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं।


