नई दिल्ली। ईरान के सुप्रीम लीडर लगे अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम गुरुवार को संपन्न हुआ। सात दिन चले इस कार्यक्रम के आखिरी दिन गुरुवार को खामेनेई को मशहद की इमाम रजा दरगाह में दफनाया गया। गौरतलब है कि शिया संप्रदाय के कुल 12 पवित्र इमामों में से इमाम रजा एकमात्र ऐसे इमाम हैं, जिन्हें ईरान की धरती पर दफनाया गया है। इसलिए मशहद में उनको दफनाए जाने की जगह को बेहद पवित्र माना जाता है। वहीं खामेनेई को दफनाया गया है।
शिया समुदाय के 12 सबसे पवित्र इमामें से 11 इमाम या तो सऊदी अरब के मदीना में हैं या इराक के नजफ, कर्बला, सामर्रा में हैं। इमाम रजा शिया इस्लाम के आठवें इमाम माने जाते हैं। उनकी बढ़ती लोकप्रियता से डरकर तत्कालीन शासक अब्बासी खलीफा ने जहर देकर हत्या करा दी थी। जहां इमाम रजा को दफनाया गया, उस जगह का नाम बाद में ‘मशहद’ यानी शहीद होने की जगह पड़ गया। यह ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है।
बहरहाल, मशहद में दफनाए जाने से पहले खामेनेई का पार्थिव शरीर इराक के नजफ और कर्बला भी ले जाया गया था। उससे पहले कोम में लाखों लोगों उनके जनाजे में शामिल हुए थे। गुरुवार को अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के पार्थिव शरीर को लेकर जनाजा मशहद की सड़कों से गुजरा। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद लोग उनके पार्थिव शरीर के साथ इमाम रजा दरगाह की ओर गए। साथ चल रही भीड़ में लोग अमेरिका और ट्रंप विरोधी बैनर लेकर चल रहे थे।


