नई दिल्ली। सोशल मीडिया मंचों पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री यानी सीएसईएएम वाले कथित विज्ञापनों की जांच के सिलसिले में मेटा इंडिया के शीर्ष अधिकारी बुधवार को एक सप्ताह में दूसरी बार राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के सामने पेश हुए। इनमें मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास भी शामिल थे। आयोग से बाहर निकलने के बाद श्रीनिवास ने बैठक के बारे में मीडिया के बार-बार पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।
सूत्रों के अनुसार श्रीनिवास और उनकी टीम ने आयोग के सामने इस मामले में वही रुख दोहराया, जो कंपनी ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सामने रखा था। एनसीपीसीआर ने नौ सितंबर को मेटा इंडिया के प्रबंध निदेशक और प्रमुख को सोशल मीडिया मंच पर सीएसईएएम से जुड़े कथित विज्ञापनों की जांच के सिलसिले में तलब किया था। आयोग ने ‘बीबीसी आई’ की एक रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेकर मेटा से स्पष्टीकरण मांगा था। आयोग ने जुलाई में कंपनी को पहला नोटिस भेजा था और बाद में मामले की औपचारिक जांच शुरू की।
एनसीपीसीआर ने एक अलग मामले में बेंगलुरु में कंपनी द्वारा संचालित एक पालना-घर में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी कैपजेमिनी के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी तलब किया।
इस बीच फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सीधे इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी आई4सी द्वारा संचालित साइबर अपराध पोर्टल पर करने के लिए सहमत हुई है। सरकार ऑनलाइन बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री और अन्य हानिकारक सामग्री को लेकर सोशल मीडिया मंचों से अधिक सुरक्षा उपाय और जवाबदेही की मांग कर रही है।
मेटा के प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी के लिए उसके मंचों पर बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता है और वह सरकार के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि ऐसे अपराध करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए।कंपनी के अनुसार बच्चों को होने वाले नुकसान से निपटने के प्रयास मजबूत करने के लिए मेटा अब बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सीधे आई4सी द्वारा संचालित साइबर अपराध पोर्टल पर करेगा।
अमेरिका में मुख्यालय वाली मेटा ऐसी व्यवस्था बनाने का वादा करने वाली पहली बड़ी प्रौद्योगिकी मध्यस्थ कंपनी है, जिसके तहत बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे भारतीय कानून प्रवर्तन व्यवस्था को दी जाएगी। अब तक मेटा ऐसे मामलों की रिपोर्ट अमेरिका स्थित ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन’ यानी एनसीएमईसी को करती रही है। नई व्यवस्था के बाद भारतीय एजेंसियों तक ऐसी सूचनाएं सीधे पहुंचाने का रास्ता बनेगा।
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.



