नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के चौथे दिन गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के सुरक्षित इस्तेमाल का नया मंत्र दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे खाने के पैकेट पर न्यूट्रिशन लेबल होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी ऑथेंटिसिटी लेबल होना चाहिए ताकि फर्क पता चल सके। हालांकि केंद्र सरकार पहले ही इसके लिए नियमावली जारी कर चुकी है। आईटी मंत्रालय ने कंपनियों के एआई जेनरेटेड कंटेंट पर लेबल लगाने का आदेश जारी किया है।
गौरतलब है कि 16 फरवरी से शुरू हुआ एआई इम्पैक्ट समिट 20 फरवरी तक चलेगा। इसमें गुरुवार को 110 से ज्यादा देश, 20 से ज्यादा देशों के प्रमुख और करीब एक सौ सीईओ और फाउंडर्स शामिल हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण कहा, ‘दुनिया के कई देशों में जहां एआई को लेकर भय का माहौल है, वहीं भारत इसे अपने भाग्य और उज्ज्वल भविष्य के रूप में देख रहा है’। उन्होंने कहा, ‘भारत इसे अपनी विकास यात्रा का अगला बड़ा टर्निंग पॉइंट मानता है’।
प्रधानमंत्री मोदी ने एआई को लेकर एक नया फ्रेमवर्क दिया। उन्होंने कहा कि एआई को मोरल यानी नैतिक, अकाउंटेबल यानी जवाबदेह, नेशनल सॉवरेंटी यानी संप्रभुता, एक्सेसबल यानी सुलभ और वैलिड यानी वैध होना चाहिए। उनका कहना है कि ऐसा होगा तभी यह केवल डेटा पॉइंट न बन कर मानवता के कल्याण का जरिया बनेगा। मोदी ने दुनिया की ‘कॉन्फिडेंशियल’ सोच से अलग हटकर एआई कोड को ‘ओपन शेयर’ करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जब तकनीक सबके लिए खुली होगी, तभी दुनिया भर के युवा दिमाग उसे बेहतर और सुरक्षित बना पाएंगे। मोदी ने यह भी कहा कि एआई नौकरियां खत्म नहीं करेगा बल्कि नए अवसर पैदा करेगा।
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