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निशाने पर नए शिक्षा मंत्री

नई दिल्ली। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया गया। अब वे विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। मंगलवार को पेपर लीक रोकने के लिए लाए गए संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने जोशी पर निशाना साधा और कहा कि उन्होंने गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई पर सहमति जताई थी। इसे लेकर लोकसभा में खूब विवाद हुआ।

बाद में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रियंका की बात से सहमति जताई और प्रहलाद जोशी पर हमला बोला। राहुल ने संसद परिसर में कहा कि प्रहलाद जोशी बलात्कारियों का बचाव करने वाले, बहुत गंदे किस्म के व्यक्ति हैं। लोकसभा में जब प्रियंका ने जोशी को लेकर यह टिप्पणी की तो पूरा सत्ता पक्ष इसके विरोध में खड़ा हो गया। सत्ता पक्ष के हंगामे की वजह से स्पीकर ओम बिरला ने बयान को रिकॉर्ड में से हटाने की बात कही। उन्होंने प्रियंका से यह भी कहा कि वे तथ्यों के सत्यापन के बगैर कोई बात नहीं कहें।

इससे पहले मंगलवार को संसद का गतिरोध खत्म हुआ और दोपहर दो बजे से पेपर लीक से जुड़े ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रीवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पर चर्चा शुरू हुई। विधेयक में 2024 में बने कानून में बदलाव का प्रस्ताव है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा इससे पेपर लीक रोकने में मदद मिलेगी। चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि दो साल पहले बने कानून को क्यों बदलने की नौबत आ गई। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के बावजूद फिर पेपर लीक हो गया।

चर्चा के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने का मुद्दा भी उठा। सदन में विवाद तब छिड़ गया, जब प्रियंका ने प्रहलाद जोशी को निशाना बनाते हए कहा, ‘एक ऐसे व्यक्ति को शिक्षामंत्री बनाया जिसने गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई पर सहमति व्यक्त की’। इसके बाद सत्ता पक्ष ने हंगामा किया। इस पर प्रियंका ने कहा, ‘जोशी जी ने बिल्किस बानो के बलात्कारियों पर बयान दिया उसका प्रमाण मैं भेज दूंगी’।

संसदीय कार्यमंत्री कीरेन रिजिजू ने इसका विरोध करते हुए कहा, ‘प्रियंका ने शिक्षा मंत्री पर जो टिप्पणी की वह चरित्र हनन है। इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न करें। वह सीनियर लीडर हैं उन्हें जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए’। गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में पहले छह कामकाजी दिनों में कोई विधायी काम नहीं हुआ। सोमवार को स्पीकर के प्रयास से गतिरोध टूटा और मंगलवार को चर्चा शुरू हुई। स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि उन्होंने चर्चा के लिए छह घंटे का समय तय किया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष चाहें तो समय बढ़ा सकते हैं।

इस पर कीरेन रिजीजू ने कहा कि सरकार ने सभी दलों से बात की है। अब आठ घंटे चर्चा होगी। जरूरत होगी तो 10 घंटे भी चर्चा को तैयार हैं। चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने जंतर मंतर पर पुलिस हिंसा की एसआईटी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर जांच के आदेश दें। उन्होंने शाह की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी उन्हीं की है।

By NI Desk

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