मुंबई। भाजपा के खिलाफ एकजुट हो रही विपक्षी पार्टियों की अगली बैठक का स्थान और तारीख दोनों बदल गए हैं। अगली बैठक शिमला की बजाय बेंगलुरू में होगी और 12 जुलाई की बजाय 13 और 14 जुलाई को होगी। एनसीपी के सुप्रीमो शरद पवार ने गुरुवार को इस बात की जानकारी दी। इससे पहले 23 जून को विपक्षी पार्टियों की पहली बैठक पटना में हुई थी, जिसमें 16 पार्टियों के नेताओं ने हिस्सा लिया था। वहीं पर तय हुआ था कि अगली बैठक शिमला में होगी। लेकिन अब इसका वेन्यू बदल दिया गया है।
पटना में 23 जून को हुई विपक्षी दलों की पहली बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने घोषणा की थी कि भाजपा के खिलाफ संयुक्त मोर्चे की रणनीति बनाने के लिए अगली बैठक शिमला में होगी। अगली बैठक की अध्यक्षता खडगे करेंगे। विपक्षी पार्टियां अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा सीटों पर साझा उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर चर्चा कर रही हैं। भाजपा के हर उम्मीदवार के खिलाफ विपक्ष का एक उम्मीदवार उतरे इसके लिए गठबंधन बनाया जा रहा है।
पटना में हुई पहली बैठक में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। केंद्र की ओर से जारी अध्यादेश के मसले पर आप ने कांग्रेस को अपना रुख साफ करने को कहा है। माना जा रहा है कि अगली बैठक में आम आदमी पार्टी गैरहाजिर हो सकती है। क्योंकि पिछली बैठक के बाद आप ने कहा कि वह भविष्य में विपक्षी दलों की ऐसी किसी बैठक में भाग नहीं लेगी, जिसमें कांग्रेस भी शामिल हो। उसने अगले विधानसभा चुनाव में राज्यों में प्रचार शुरू कर दिया और गठबंधन की संभावना समाप्त करते हुए दिल्ली में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर दिया है।
बहरहाल, माना जा रहा है कि अगली बैठक में विपक्षी मोर्चे के संयोजक या समन्वयक का नाम तय होगा, साझा कार्यकर्म पर चर्चा होगी और प्रधानमंत्री पद के दावेदार पर भी चर्चा होगी। शरद पवार ने पिछले दिनों साफ कर दिया था कि पटना बैठक में प्रधानमंत्री पद के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा था कि बैठक में महंगाई, बेरोजगारी और देश के कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देने के जान बूझकर किए गए प्रयासों जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर यह बैठक हुई थी।
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