नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और यूरोप के कई देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद ग्रीनलैंड का विवाद तेज हो गया है। शनिवार को हजारों लोगों ने सड़कों पर उतर कर राष्ट्रपति ट्रंप का विरोध किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की खबरों के मुताबिक बर्फ से ढकी सड़कों के बीच प्रदर्शनकारी ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक के डाउनटाउन से अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक पहुंचे।
बताया जा रहा है कि प्रदर्शन में राजधानी नुउक की लगभग एक चौथाई आबादी शामिल हुई। यानी चार में से एक व्यक्ति आंदोलन में शामिल हुआ। पुलिस ने इसे अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन माना है। हालांकि ग्रीनलैंड के विरोध और यूरोप के देशों के विरोध के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप इस पर कब्जा करने के लिए अड़े हुए हैं। ग्रीनलैंड पर कब्जे का विरोध कर रहे यूरोप के आठ देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। इससे ग्रीनलैंड के लोगों में ट्रंप को लेकर गुस्सा और बढ़ गया।
ट्रंप की धमकियों से नाराज यूरोपीय संघ के सांसद अमेरिका के साथ हुई व्यापार संधि की मंजूरी रोकने की तैयारी में हैं। यूरोपियन पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष मैनफ्रेड वेबर ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ट्रंप की ग्रीनलैंड धमकियों के कारण अमेरिका से समझौते को मंजूरी देना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी व्यापार समझौते के पक्ष में थी, लेकिन ट्रंप की ग्रीनलैंड धमकियों के कारण अब मंजूरी संभव नहीं। यूरोपीय संसद के अन्य समूह भी समझौते को फ्रीज करने की मांग कर रहे हैं। अगर फैसले को लेकर सहमति बनती है, तो समझौता रुक सकता है।
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