धार (मध्य प्रदेश)। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक धार की भोजशाला में शुक्रवार को बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा और जुमे की नमाज एक साथ कराई गईं। सर्वोच्च अदालत ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक सरस्वती पूजा की छूट दी थी। इसलिए शुक्रवार सुबह छह बजे सूर्योदय के साथ ही भक्तों ने सरस्वती पूजन शुरू कर दिया, जो सूर्यास्त तक चला। वहीं, दोपहर में एक से तीन बजे तक भोजशाला परिसर में ही मुस्लिम समाज ने नमाज अदा की।
दस साल के बाद ऐसा हुआ कि सरस्वती पूजा और जुमे की नमाज एक दिन हुई और प्रशासन ने दोनों को शांति के साथ संपन्न कराया। शुक्रवार को सरस्वती पूजा और जुमे की नमाज में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी मुस्तैदी बरती। दोनों पक्षों के शांतिपूर्वक तरीके से पूजा करने के लिए भोजशाला परिसर को छह सेक्टर में जबकि पूरे शहर को सात जोन में बांटा गया था। स्थानीय पुलिस, सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स के आठ हजार से ज्यादा जवान शहर भर में तैनात किए गए थे।
इस बीच नमाज पढ़ने को लेकर दो अलग अलग तरह के दावे किए गए हैं। जिला प्रशासन ने भोजशाला में ही मुस्लिम लोगों के शांतिपूर्वक नमाज अदा करने की बात कही। दूसरी ओर कुछ लोगों ने कहा कि अधिकारियों ने उन्हें और उनके साथियों को 16 घंटे तक कमाल मौला मस्जिद में रोककर रखा, लेकिन उनसे नमाज नहीं पढ़वाई गई। पीछे की तरफ कुछ लोगों से नमाज पढ़वाकर वीडियो बना लिया गया। बहरहाल, दावे जो हों लेकिन प्रशासन ने शुक्रवार को शांति कायम रखी।
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