लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से 10 महीने पहले योगी आदित्यनाथ सरकार का विस्तार हुआ। रविवार को छह नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई और साथ दो राज्यमंत्रियों को तरक्की देकर स्वतंत्र प्रभार का मंत्री बनाया गया। रविवार को शपथ लेने वालों में दो कैबिनेट मंत्री और चार राज्यमंत्री बनाए गए। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जाट समुदाय से आने वाले भूपेंद्र चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। कैबिनेट विस्तार में ब्राह्मण, जाट, दलित, पिछड़ा सबका संतुलन बनाया गया है।
रविवार को लोकभवन में आयोजित समारोह में सबसे पहले भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने शपथ ली। इसके बाद सपा के बागी विधायक मनोज पांडेय ने शपथ ली। दोनों को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। बाद में समाजवादी पार्टी ने कहा कि वह मनोज पांडेय को मंत्री बनाए जाने को चैलेंज नहीं कर सकती है क्योंकि पार्टी पहले ही उनको निकाल चुकी है। सपा ने उनको 2024 में पार्टी से निकाला था। अब भाजपा ने उनको मंत्री बनाया है।
दो कैबिनेट मंत्रियों के बाद अजीत पाल और फिर सोमेंद्र तोमर ने शपथ ली। दोनों को प्रमोट कर स्वतंत्र प्रभार का राज्य मंत्री बनाया गया। इसके बाद कृष्णा पासवान, कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली। कृष्णा पासवान पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता थीं। नए बनने वाले मंत्रियों में एक ब्राह्मण, तीन ओबीसी और दो दलित वर्ग से हैं। खास बात यह रही कि शपथ के बाद अजीत पाल, सोमेंद्र तोमर, कृष्णा पासवान, कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनथा के पैर छुए।
बहरहाल, इस विस्तार के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिला कर कुल 60 मंत्री हैं। इस तरह पूरी कैबिनेट भर गई है। राज्य में इतने ही मंत्री बन सकते हैं। गौरतलब है कि दूसरी बार सरकार बनने पर योगी मंत्रिमंडल का पहला विस्तार 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पांच मार्च, 2024 को हुआ था।
मंत्रियों की शपथ के बाद भाजपा में नाराजगी भी शुरू हो गई है। मंत्री पद न मिलने से नाराज भाजपा विधायक आशा मौर्या ने पार्टी पर अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मौर्य समाज की अनदेखी की गई है। दलबदलू नेताओं को तवज्जो दी गई। गौरतलब है कि आशा मौर्य सीतापुर में महमूदाबाद सीट से विधायक हैं।


