नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर 36 दिन आंदोलन करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रदर्शनकारियों को दिल्ली सरकार ने बड़ी राहत दी है। 26 दिन भूख हड़ताल करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और सीजेपी के दो प्रतिनिधियों के साथ बनी सहमति के मुताबिक दिल्ली सरकार ने ऐलान किया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चलेगा। दिल्ली सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की भी घोषणा कर दी है।
हालांकि दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के मुताबिक इस मामले में एक शर्त लगा दी है। सरकार ने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ मुकदमा वापस होगा, आगे जांच नहीं होगी और भविष्य में कोई कार्रवाई नहीं होगी। लेकिन आपराधिक छवि वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। गौरतलब है कि सोनम वांगचुक ने भी यही बात कही थी। उन्होंने अस्पताल से छूटने के बाद राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी थी और कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को ही राहत मिलेगी। जान बूझकर अराजकता फैलाने वाले या आपराधिक छवि के लोगों को राहत नहीं मिलेगी।
बहरहाल, गुरुवार, 30 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने एक बयान में बताया कि पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के सिलसिले में 29 जुलाई की शाम छह बजे तक 13 एफआईआर दर्ज की गई थीं। पुलिस ने कहा कि सरकार के आदेश के अनुसार, जिन लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है, उन्हें जल्दी ही रिहा कर दिया जाएगा। हालांकि, सरकार ने कहा कि जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार ने यह भी कहा कि इस मामले को अब बंद माना जाएगा और भविष्य में इन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई नई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
गौरतलब है कि अब तक चार राज्यों की सरकारें नीट यूजी 2026 के पेपर लीक होने के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज मामले और एफआईआर वापस लेने की घोषणा कर चुकी हैं। इनमें असम, बिहार, महाराष्ट्र और दिल्ली शामिल हैं। बिहार पुलिस ने 26 जुलाई की शाम छह बजे तक दर्ज सभी मामले वापस लेने का ऐलान किया था। बिहार सरकार ने कोई शर्त नहीं लगाई थी। बिहार की घोषणा के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया था, जिसमें आपराधिक छवि वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की बात कही गई थी।
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