नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के आर्थिक विकास के आंकड़े जारी किए हैं। ईरान और अमेरिका की जंग की वजह से ईंधन और अन्य उत्पादों की आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने से भारत में महंगाई बढ़ी और अर्थव्यवस्था दबाव में रही। इसके बावजूद पहली तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के बढ़ने की दर अनुमान से ज्यादा रही। पहली तिमाही में जीडीपी 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी है, जबकि रिजर्व बैंक का अनुमान सात फीसदी था। पिछले साल की पहली तिमाही में विकास दर 6.9 फीसदी रही थी।
सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त, रियल एस्टेट, आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में 12 फीसदी से ज्यादा की बढ़त रही। इससे महंगाई का असर जीडीपी की विकास दर पर नहीं पड़ा। केंद्र सरकार के सांख्यिकी विभाग ने सोमवार को यह आंकड़ा जारी किया। हालांकि कृषि विकास दर चार फीसदी से कम रही है। इसे लेकर कांग्रेस ने केंद्र पर निशाना साधा और कहा कि सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला सेक्टर पिछ़ड़ रहा है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि आधार वर्ष बदल कर 2022 करने से विकास दर ज्यादा दिखती है।
दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘दुनिया भर के संकटों और तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद, भारत ने इस साल की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ हासिल की है। यह देश के लोगों की ताकत का नतीजा है। मंदी की आशंका जताने वाले फिर पीछे छूट गए और भारत ने एक बार फिर बड़ी कामयाबी हासिल की’। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, रियल जीडीपी 7.8 फीसदी की दर से बढ़ कर 81.36 लाख करोड़ रुपए रही। एक साल पहले यह 75.46 लाख करोड़ रुपए थी।
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