चालू वित्त वर्ष में होगी 10% से ज्यादा वृद्धि

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि रिकॉर्ड खरीफ फसल, और रबी फसल की उज्ज्वल संभावनाओं को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि करने की उम्मीद है

विमुद्रीकरण के 5 साल, डिजिटल लेनदेन के उपयोग में स्थायी वृद्धि – रिपोर्ट

विमुद्रीकरण ने भारत को कम नकदी आधारित अर्थव्यवस्था बना दिया है।

आर्थिकी ने कोरोना को दी मात!

देश चालू वित्तवर्ष 2021-22 में 400 अरब डॉलर के रिकॉर्ड निर्यात का आंकड़ा छूने जा रहा है। पहले सात माह (अप्रैल-अक्टूबर 2021) में 232 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात किया जा चुका है।

अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को ‘एसबीआई जैसे’ 4-5 बैंकों की जरूरत: सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को कहा कि भारत को अर्थव्यवस्था और उद्योग की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए 4-5 ‘एसबीआई जैसे आकार वाले’ बैंकों की जरूरत है।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ विकास में लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू करेंगे ‘मातृ भूमि योजना’

राज्य सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक इसके तहत हर व्यक्ति को गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास के विभिन्न कार्यों में सीधे तौर पर हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। परियोजना की कुल लागत का 50 प्रतिशत सरकार वहन

सेमीकंडक्टर्स के लिए खींचतान

कोरोना महामारी के कारण पहले इसका सप्लाई चेन टूटा। फिर अमेरिका और चीन के बीच बढ़े टकराव ने हालात और बिगाड़ दिए। नतीजा हुआ कि सेमीकंडक्टर की मांग और सप्लाई में बड़ा अंतर आ गया।

महंगाई के मुकाबले जनसंख्या का मुद्दा

inflation population : भारतीय जनता पार्टी पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और खुदरा व थोक महंगाई में हो रही बढ़ोतरी से ध्यान भटकाने के उपाय में लग गई है। महंगाई के मुकाबले जनसंख्या का मुद्दा ला दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण नीति का मसौदा जारी कर दिया है। इस पर लोगों की राय ली जा रही है लेकिन यह तय है कि अगले साल होने वाले चुनाव से पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून बना दिया जाएगा और दो बच्चों की नीति लागू कर दी जाएगी। उत्तर प्रदेश के साथ साथ असम ने भी इस तरह का कानून बनाने की शुरुआत हो गई है। गुजरात सरकार ने भी कहा है कि वह कानूनों का अध्ययन कर रही है और उसके बाद कदम उठाए जाएंगे। Read also: आर्थिकी को संभालने के छोटे-छोटे उपाय! Read also कावड़-यात्रा और महामारी inflation population इस बीच केंद्र सरकार के मंत्री गिरिराज सिंह ने एक आंकड़ा देकर बताया कि भारत में हर मिनट 32 बच्चे पैदा हो रहे हैं इसलिए जनसंख्या नियंत्रण कानून जरूरी है। अब खबर है कि भाजपा के कम से कम दो सांसद मॉनसून सत्र में दो बच्चों की नीति का प्राइवेट मेंबर बिल पेश करने वाले हैं। इस तरह से… Continue reading महंगाई के मुकाबले जनसंख्या का मुद्दा

आर्थिकी को संभालने के छोटे-छोटे उपाय!

small measures handle the economy : केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए छोटे-छोटे उपाय कर रही है, जिनका कोई खास फायदा नहीं होने वाला है। सारे आर्थिक जानकार बता रहे हैं कि इस समय सरकार को पूंजीगत खर्च बढ़ाना चाहिए और लोगों के हाथ में नकद पैसा पहुंचाना चाहिए ताकि मांग बढ़े। इसके उलट सरकार खर्च घटाने के उपाय कर रही है। साथ ही सरकारी कंपनियों को बेचने के काम में तेजी लाई जा रही है ताकि पैसे का इंतजाम हो सके। बैंकों की खराब होती हालत को ठीक करने का सरकार ने यह तरीका निकाला है कि हर साल लाखों करोड़ रुपए का कर्ज बट्टे खाते में डाल दिया जा रहा है ताकि एनपीए कम दिखे। 2020-21 में एक लाख 89 हजार करोड़ रुपए राइट ऑफ किए गए हैं यानी बट्टे खाते में डाले गए हैं। उससे पहले दो लाख 47 हजार करोड़ रुपए बट्टे खाते में डाले गए थे। Read also कावड़-यात्रा और महामारी बहरहाल, भारत सरकार की ओर से कई मंत्रालयों से खर्च घटाने को कहा गया है। केंद्र ने स्टील, लेबर और विमानन सहित कोई एक सौ विभागों से खर्च घटाने को कहा है। इन विभागों को बजट अनुमान के 20 फीसदी तक ही खर्च… Continue reading आर्थिकी को संभालने के छोटे-छोटे उपाय!

महंगाई का आंकड़ा दायरे से बाहर

नई दिल्ली। जून के महीने में भी खुदरा महंगाई का आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से तय किए गए दायरे से ऊपर रहा ( Inflation out of range ) । राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, एनएसओ की ओर से जारी आंकड़े के मुताबिक जून महीने में खुदरा महंगाई की दर 6.26 फीसदी रही। भारतीय रिजर्व बैंक ने चार फीसदी का दायरा तय किया है और दो फीसदी का मार्जिन रखा है। खुदरा महंगाई की दर चार फीसदी और दो फीसदी के मार्जिन से ऊपर रही। Corona: तीसरी लहर बेहद करीब, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की चेतावनी पिछले महीने यानी मई में खुदरा महंगाई की दर 6.30 फीसदी थी। इस लिहाज से 0.04 फीसदी की मामूली कमी इसमें हुई है लेकिन उससे आमलोगों को कोई खास राहत नहीं मिलेगी। एनएसओ के आंकड़ों के मुताबिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई की दर में सबसे ज्यादा हिस्सा खाने-पीने की चीजों का है। जून के महीने में खाने-पीने की चीजें मई के मुकाबले ज्यादा महंगी हुईं। खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ने का कारण पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत में हुई बढ़ोतरी है। एनएसओ की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर जून में 5.15 फीसदी रही, जो मई में… Continue reading महंगाई का आंकड़ा दायरे से बाहर

समस्या देशों के अंदर है

जब तक ये व्यवस्था नहीं बदलती, इस समस्या का हल वैश्विक स्तर पर ढूंढना महज उन संसाधन को वापस धनी देशों में लाने का प्रयास भर है, जो अभी आयरलैंड या लक्जमबर्ग या बारबेडोस जैसे देशों को इसलिए मिल जाते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने यहां टैक्स दरें कम कर रखी हैँ। global minimum tax : ये खबर ऊपर से आकर्षक लग सकती है कि अमेरिका की पहल पर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले 130 देश वैश्विक न्यूनतम कर (ग्लोबल मिनिमम टैक्स) के प्रस्ताव पर सहमत हो गए हैं। ये देश दुनिया की अर्थव्यवस्था के 90 फीसदी हिस्से की नुमाइंदगी करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि अगर ये टैक्स व्यवस्था लागू हो भी गई, तो क्या उससे पूरी दुनिया में प्रगतिशील टैक्स ढांचा लागू हो जाएगा? प्रगतिशील टैक्स ढांचे का मतलब यह होता है कि जिसकी जितनी अधिक आमदनी है, उससे उतना अधिक टैक्स लिया जाए। दूध पीना और महंगा! Mother Dairy ने भी बढ़ाए दूध के दाम, कल से 2 रुपए देने होंगे ज्यादा अभी हाल में जो तथ्य सामने आए हैं, वे यह बताते हैं कि विकसित देशों ने अपने यहां ऐसा टैक्स ढांचा अपना रखा है, जिससे सबसे धनी लोग सबसे कम और आम मध्यवर्गीय लोग अपनी… Continue reading समस्या देशों के अंदर है

ये विषमता कहां ले जाएगी?

inequality india rich poor : केंद्रीय बैंक बड़ी संख्या में नोट छाप कर ब्याज दरों को कम करना चाहते थे, ताकि लोन देकर उद्योगों को बढ़ावा दे सकें और अर्थव्यवस्था को नुकसान से निकाला जा सके। लेकिन ऐसा होने के बजाए यह पैसा शेयर बाजार में लगाया गया। नतीजतन वही लोग अमीर होते रहे, जो पहले से अमीर थे। कोरोना महामारी की मार पूरी दुनिया पर पड़ी। भारत सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में एक रहा। ये एक आपदा है, यह मानने में कोई हिचक नहीं हो सकती। लेकिन किसी परिवार में अगर किसी आपदा से सभी बराबर पीड़ित हों, तो सब यह मान लेते हैं कि बुरा वक्त आया, तो उसका नतीजा सबको भुगतना पड़ा। लेकिन अगर बुरा वक्त किसी एक तबके लिए चमकने का मौका मिल जाए, तो समाज में सवाल उठेंगे। न सिर्फ सवाल उठेंगे, बल्कि देर सबेर असंतोष भी पैदा होगा। आज हम उसी कगार पर हैँ। एक ताजा रिपोर्ट ने बताया है कि (डॉलर को मुद्रा का आधार मानें तो) 2020 में हर भारतीय परिवार की घरेलू संपत्ति 6.1 प्रतिशत कम हो गई है। रुपये को आधार माने तो यह कमी करीब 3.7 प्रतिशत है। संपत्ति में आई इस कमी की मुख्य वजह यहां जमीन… Continue reading ये विषमता कहां ले जाएगी?

इस अंतर्विरोध का मतलब

यह वो पैसा है, जिसे कंपनियां कुछ समय के लिए लगाती हैं। ऐसे निवेश से ना किसी नौकरी मिलती है और ना ही वहां बुनियादी ढांचे का विकास होता है। तो ऐसा निवेश, जिससे देश में उत्पादक संपत्ति की बढ़ोतरी ना हो, वह अर्थव्यवस्था में एफडीआई की भूमिका पर सवाल खड़े करता है। indias record fdi : भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक भारत में रिकॉर्ड विदेशी निवेश हो रहा है। सरकार का कहना है कि एफडीआई पॉलिसी में सुधार, निवेश के लिए सुविधाएं देने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मोर्चों पर सरकार की ओर से उठाए गए कदमों ने देश में एफडीआई को बढ़ाया है। आम धारणा रही है कि विकासशील देशों में उद्योग-धंधे बढ़ाने और नौकरियां पैदा करने में एफडीआई का अहम रोल होता है। इससे देश के बुनियादी ढांचे का विकास होता है। और जब ऐसा होता है, तो रोजगार के अवसर बढ़ते हैँ। विदेशी निवेश के महिमामंडन का यही तर्क है। लेकिन हालांकि अब कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी में इकोनॉमिक्स के एक अध्ययन से सामने आया कि एफडीआई और नौकरियों के बीच संबंध नहीं है। यानी ऐसा नहीं कहा जा सकता कि इतना एफडीआई ( indias record fdi ) आने पर इतनी नौकरियां पैदा… Continue reading इस अंतर्विरोध का मतलब

इस साल भी कावड़ यात्रा में रोड़ा बना कोरोना, चारधाम यात्रा भी की गई रद्द

देहरादून |  कोरोना ने पिछले मार्च 2020 से कोई भी आयोजन नहीं होने दिया है। पिछले साल से देश में कोई भी आयोजन नहीं हो रहे है। सावन के महीने से शुरु होने वाली कावड़ यात्रा पर इस बार भी उत्तराखंड सरकार ने प्रतिबंध ( kawad yatra banned ) लगा दिया गया है। सावन का पवित्र महीने के पहले दिन से या उससे पहले से शिव भक्त गंगाजल लेने के लिए पैदल जाते है। और अपने इलाके में आकर शिवलिंग पर उस जल को अर्पित करते है। कुछ कावड़िये ऐसे भी होते है जो गौमुख तक गंगाजल लेने पहुंच जाते है। गौमुख जहां से गंगा नदी का उद्गम हुआ था। यह दूसरा साल है जब कावड़ यात्रा पर रोक लगाई गई है। कावड़ यात्रा ही नहीं चारधाम यात्रा पर भी सरकार ने हाइकोर्ट के आदेश के बाद रोक लगा दी गई है। चारधाम यात्रा भी रोकी गई kawad yatra banned  चारधाम यात्रा को लेकर कई बार निर्णय बदला जा चुका है। लेकिन सोमवार को हाइकोर्ट ने सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी थी। इके बाद भी उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा को लेकर गाइडलाइन ज़ारी कर दी। लेकिन फिर सरकार ने भी भक्तों के स्वास्थ्य की चिंता करते… Continue reading इस साल भी कावड़ यात्रा में रोड़ा बना कोरोना, चारधाम यात्रा भी की गई रद्द

G7 Summit Infra Project : सपना कैसे होगा साकार?

चीन का मॉडल यह है कि ऋण चीन देता है, चीन की कंपनियां परियोजना पर काम करती हैं, जिनमें चीन में ही उत्पादित सामग्रियों का इस्तेमाल होता है। चीन ऐसा इसलिए कर पाया, क्योंकि वहां अर्थव्यवस्था में सरकार का काफी दखल है। जबकि जी-7 की अर्थव्यवस्था निजी क्षेत्र के हाथ में है। जी-7 ने अपनी हाल की शिखर बैठक में चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना का जवाब उससे भी बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट ( g7 summit infra project ) से देने का एलान किया। इसे बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड (बी3डब्लू) परियोजना नाम दिया गया है। जाहिर है, इसको लेकर दुनिया भर में भारी दिलचस्पी पैदा हुई है। लेकिन असल सवाल यह उठा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए धन कौन देगा? चीन का मॉडल तो यह है कि ऋण चीन के ही बैंक देते हैं, चीन की कंपनियां परियोजना पर काम करती हैं, जिनमें ज्यादातर चीन में ही उत्पादित सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह चीन ने अपने अंदरूनी विकास को दुनिया की एक बड़ी परियोजना से जोड़ दिया है। चीन ऐसा इसलिए कर पाया, क्योंकि वहां अर्थव्यवस्था में सरकार का काफी दखल है। पश्चिमी देशों में अर्थव्यवस्था मोटे तौर पर प्राइवेट सेक्टर के हाथ में है।… Continue reading G7 Summit Infra Project : सपना कैसे होगा साकार?

अब कितना नोट छापे सरकार!

Indian Currency Rupees Status | केंद्र सरकार ने नोट छाप कर ढेर लगा दिया है, फिर भी आर्थिकी के कई जानकार चाहते हैं कि सरकार और नोट छापे। सरकार अगर ज्यादा नोट छापती है तो मुद्रा की कीमत और गिरेगी। इससे हो सकता है कि लोगों के पास नकदी ज्यादा आ जाए लेकिन यह क्रयशक्ति बढ़ने की गारंटी नहीं होगी क्योंकि ज्यादा नोट छाप कर बाजार में चलन में लाने का खतरा यह है कि मुद्रा का अवमूल्यन होगा और महंगाई बढ़ेगी क्योंकि बाजार में नकदी ज्यादा आने से उत्पादन नहीं बढ़ेगा लेकिन मांग जरूर बढ़ जाएगी। यह भी पढ़ें: सबको पीछे छोड़ देंगे हिमंता सरमा यह भी पढ़ें: बंगाल की चुनावी लड़ाई अब अदालत में बहरहाल, भारत में सरकार पहले से ही नोट छापे जा रही है। कोरोना वायरस (Corona Virus 2019 ) का संक्रमण शुरू होने के बाद सरकार ने खुद ही इसमें तेजी ला दी है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2020 में देश में 21.79 लाख करोड़ रुपए की नकदी थी, जो मार्च 2021 में बढ़ कर 28.60 लाख करोड़ हो गई। सोचें, एक साल से कुछ ज्यादा समय में सात लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की नकदी बाजार में आ गई। नवंबर 2016… Continue reading अब कितना नोट छापे सरकार!

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