आर्थिक गिरावट का अर्थशास्त्र

लोग चीजें खरीदने की स्थिति में नहीं होंगे, तो कारखाना मालिक किसके लिए उत्पादन करेंगे?

विश्व बैंक ने भी बदला विकास अनुमान

बैंक ने चार महीने में भारत की विकास दर के अपने अनुमान में एक फीसदी की कमी की है। साढ़े छह फीसदी रहेगी।

माया मिली ना राम!

इस वर्ष जनवरी से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 90 बिलियन डॉलर की गिरावट आई है।

इंडिया की ये रेटिंग

मार्केट रिसर्च एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में बताया है कि देश में वेतन वृद्धि में लगातार हो रही गिरावट एक बड़ा सिरदर्द बन गई है।

भारत ब्रिटेन से बड़ा सेठ लेकिन….

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ताजा रपट पर भारत का ध्यान सबसे ज्यादा जाएगा, क्योंकि उसके अनुसार भारत अब ब्रिटेन से बड़ा सेठ बन गया है।

व्यापार घाटा, समाधान ढूंढे

बीते जून में भारत के व्यापार घाटे का रिकॉर्ड बना था, जब ये घाटा 26 बिलियन डॉलर से अधिक दर्ज हुआ। तभी उसे चेतावनी की एक घंटी बताया गया था।

अमेरिकी मंदी की पहेली

आशंका यह है कि अमेरिका मंदी का शिकार हुआ, तो उसका असर सारी दुनिया पर पड़ेगा।

एक बबूले का फूटना

सत्ताधारी नेताओं ने जोर-शोर से यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स का प्रचार दुनियाभर में किया। लेकिन ये यूनिकॉर्न अब हांफते दिखाई दे रहे हैं। वहां नौकरियां जा रही हैं और कंपनियां लड़खड़ा रही हैं।

आर्थिकी भी अपने आप चल रही

ऐसा नहीं है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष की राजनीति स्वचालित मोड में आ गई है तो सरकार खुल कर और जम कर काम कर रही है। सरकार का काम भी स्वचालित मोड में चल रहा है।

ये कैसी आत्म-निर्भरता?

इस महीने रोजगार की तलाश से निराश होकर 14 लाख लोगों ने अपने को इस बाजार से अलग कर लिया। इस तरह भारत के श्रम बाजार में मौजूद लोगों की संख्या 39 करोड़ 60 लाख रह गई है।

महंगाई के दुष्चक्र में विकास

पैसे पहुंचाने का एक तरीका यह है कि उत्पाद शुल्क में कमी करके तेल की खुदरा कीमतों को बढ़ने से रोका जाए। दूसरा तरीका सरकारी खर्च बढ़ाने और रोजगार पैदा करने का है।

आर्थिक बदहाली का दौर

हकीकत अब रूस के भी सामने है कि यूक्रेन पर हमले के बाद लगाए गए बेहद सख्त प्रतिबंधों का उसकी अर्थव्यवस्था पर कितनी गंभीर मार पड़ रही है।

यूपी की इकोनॉमी एक ट्रिलियन की बनेगी!

देश की अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डॉलर की बनाने की चर्चा इन दिनों बंद हो गई है। कोरोना वायरस की महामारी शुरू होने से थोड़ा पहले ही यह चर्चा बंद हो गई थी

आए बड़े विकट दिन

अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि जो हालात बन रहे हैं, उनकी वजह से धनी देशों में रोजमर्रा की जिंदगी मंहगी होगी।

कंगाली में आटा गीला

ज्यादा दिन नहीं बीते, जब भारत सरकार ने बहुत जोश के साथ कहा कि अगले साल विकास दर आठ से साढ़े आठ फीसदी रहेगी। भारत की ओर से आर्थिक सर्वेक्षण में यह बात कही गई थी।

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