Economy

  • फिर जोखिम क्यों उठाएं?

    रेंटियर अर्थव्यवस्था में, जिनके पास रियल एस्टेट या वित्तीय संपत्तियां हैं, उनकी आमदनी तेजी से बढ़ती है, जबकि श्रम आधारित तबकों के लिए अवसर सिकुड़ते हैँ। भारत में फिलहाल यही हो रहा है। भारत का कॉरपोरेट सेक्टर अब मुनाफे के लिए औद्योगिक या कारोबारी कार्यों पर निर्भर नहीं रह गया है। बल्कि उसका ध्यान उन माध्यमों में निवेश करने पर ज्यादा है, जिन्हें ‘रेंटियर’ अर्थव्यवस्था (किराया/ ब्याज, शेयर बाजार लाभांश, ब्याज, सट्टा बाजार) का हिस्सा माना जाता है। एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित आय कर रिटर्न के 2012-13 से 2023-24 तक के आंकड़ों के विश्लेषण से जाहिर हुआ है कि...

  • चूके अवसरों की कहानी

    जिस समय देश में ‘विश्व गुरु’ बनने की खुशफहमी का आलम था, असल में भारत सरकार अवसरों का लाभ उठाने की कारगर रणनीति बनाने में नाकाम रही। दो बड़े थिंक टैंक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। दो थिंक टैंक इस समान निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि 2018 के बाद वैश्विक समीकरणों में शुरू हुए तेज बदलाव से जो अवसर सामने आया, भारत उसका लाभ उठाने में विफल रहा। दरअसल, यह उस दौर की कथा है, जिसमें भारत के ‘विश्व गुरु’ बनने की कहानियों पर करोड़ों देशवासी यकीन किए हुए थे। लेकिन जिस समय ऐसी खुशफहमी का आलम था, असल में...

  • जैसा रास्ता, वैसी मंजिल!

    वियतनाम, श्रीलंका, फिलीपीन्स और जॉर्डन की प्रति व्यक्ति औसत आय 4,635 डॉलर से अधिक हो गई है, जिससे वे उच्च मध्यम आय वर्ग में पहुंच गए हैं। भारत अभी इस मंजिल से कोसों दूर है। विश्व बैंक ने बीते हफ्ते वियतनाम, श्रीलंका, फिलीपीन्स और जॉर्डन को उच्च-मध्यम आय वर्ग वाली देशों की श्रेणी में डाल दिया, जबकि जाहिर हुआ कि भारत अभी इस मंजिल से बहुत दूर है। “सबसे तेजी से उठती अर्थव्यवस्था” और “विकसित भारत” की कहानियों में यकीन करने वाले समूहों में इस खबर से बड़ी बेचैनी देखी गई है। विश्व बैंक प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय के...

  • भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था

    भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। देश में मजबूत आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ पूंजी बाजार में भी संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।  अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। जब कई बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण अपनी विकास दर के अनुमान घटा रही हैं, भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। आईएमएफ के अनुसार, भारत इस समय दुनिया की सबसे...

  • अवसर है पर भारत रहेगा बाजार!

    पूरी दुनिया की भू राजनीति में उथलपुथल है। पिछले आठ दशक से ज्यादा समय से अमेरिका के सबसे भरोसे के सहयोगी रहे यूरोपीय देशों का भरोसा टूटा है तो चीन और रूस जैसे अमेरिका के घोषित प्रतिद्वंद्वियों या दुश्मनों को भी नए सिरे से अपनी नीतियां बनाने की जरुरत महसूस हो रही है। ट्रंप भले दावा करें कि उन्होंने आठ युद्ध रुकवाए हैं, हकीकत यह है कि उन्होंने सात युद्ध शुरू किए हैं। सीरिया से लेकर लीबिया, नाइजीरिया, वेनेजुएला, ईरान तक अमेरिका ने बमबारी की है। उन्होंने कनाडा, वेनेजुएला और ग्रीनलैंड को अमेरिका के नक्शे का हिस्सा बता दिया है।...

  • हेडलाइन भर मजबूत है

    ज्यादा चिंता का पहलू निजी उपभोग की वृद्धि दर में गिरावट है। यानी इनकम टैक्स की छूट सीमा 12 लाख रुपये करने, जीएसटी दरों का नया ढांचा लागू करने, और मुद्रास्फीति कम रहने के बावजूद निजी उपभोग में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई। केंद्र ने अपने पहले वार्षिक अनुमान में कहा है कि 2025-26 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.4 रहेगी। वैसे, अंतिम आंकड़े मई में जाकर मालूम होंगे, फिर भी ताजा अनुमान महत्त्वपूर्ण है। इसलिए कि इन आंकड़ों को ही आधार बना कर वित्त मंत्री अगला बजट पेश करेंगी। शीर्षक के मुताबिक इस वर्ष जीडीपी की वास्तविक वृद्धि दर...

  • भारत के आंकड़ों के ‘सी ग्रेड’ में जाने की कहानी

    भविष्य में जब इतिहास लिखा जाएगा, तो उसमें यह दर्ज होगा कि जो भारत में आत्म-साक्षात्कार का जो तरीका महालनोबिस की टीम ने बनाया, उसे अपनी फ़ौरी सियासी जरूरतों को पूरा करने के लिए किस तरह नरेंद्र मोदी सरकार ने लांछित कर दिया। इस सरकार और इसके समर्थकों को अभी शायद ये अहसास नहीं है कि इसकी कितनी महंगी कीमत इस देश को भविष्य में चुकानी होगी। मीडिया के एक हिस्से ने इस बार सीधे सरकारी प्रेस विज्ञप्ति छाप देने से आगे जाकर पत्रकारिता की, तो यह तथ्य लोगों के सामने आया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत सरकार...

  • यही तो उपलब्धियां हैं!

    नागेश्वरन ने कहा कि आईपीओ को मूल निवेशकों ने संबंधित उद्यम से अपना पैसा निकालने का माध्यम बना लिया है। यानी बहुत से आईपीओ ऐसे हैं, जिनका मकसद पूंजी जुटा कर आगे निवेश करना या उद्यम को फैलाना नहीं है। भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की खूबी यह है वे अक्सर दो-टूक बयानी कर जाते हैं। यह अलग बात है कि उनकी बातों- यानी सलाह का सरकार की रीति-नीति पर असर कम ही नजर आता है। बहरहाल, फिर उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के स्वरूप पर कुछ ऐसा कहा है, जो बने- बनाए नैरेटिव से मेल नहीं खाता।...

  • विषमता है एक घुन

    जिस छोटे से तबके के हाथ में धन केंद्रित होता है, सरकारी नीतियों पर उसका शिकंजा कस जाता है। यानी गैर-बराबरी ऐसा घुन है, जो लोकतंत्र को कुतर डालती है। भारत में अमीर- गरीब की खाई तेजी से बढ़ी है। भारत में आर्थिक गैर-बराबरी अत्यधिक बढ़ चुकी है, यह कोई नया तथ्य नहीं है। नई बात सिर्फ यह है कि इस बार जी-20 समूह की तरफ से नियुक्त मशहूर अर्थशास्त्रियों के टास्क फोर्स ने इस ओर ध्यान खींचा है। जोसेफ स्टिग्लिट की अध्यक्षता वाले इस टास्क फोर्स ने गैर-बराबरी बढ़ने के परिणामों का भी उल्लेख किया है। साथ ही बताया...

  • बढ़ता कर्ज, घटती संपत्ति

    साल 2019 के बाद से भारतीय परिवारों की औसत संपत्ति 48 प्रतिशत बढ़ी है, लेकिन इसी दौरान उपर कर्ज का बोझ 102 फीसदी बढ़ गया है। इसके पहले भारतीय परिवारों की बचत में भारी गिरावट के तथ्य सामने आ चुके हैं। परिवारों में बचत की घटी क्षमता के कारण उन पर कर्ज बढ़ने और उनकी संपत्ति घटने के रुझान ने अब और ठोस रूप ले लिया है। कोरोना काल के बाद से ही यह प्रवृत्ति उजागर होने लगा थी, जो लगातार गंभीर होती जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक की एक ताजा रिपोर्ट ने इसी बात की पुष्टि की है।...

  • आर्थिक चाल बदली है तो नीति भी बदले!

    भारत में अब खपत-आधारित विकास मॉडल उभर रहा है। पहले निवेश और बचत पर बल था; अब उपभोग और ऋण पर आधारित वृद्धि हो रही है।... उपभोक्ता कर्ज का फैलाव अब नई आर्थिक ताकत का संकेत बन चुका है। गांवों में भी अब डिजिटल लोन सहजता से मिल रहे हैं। पहले जहां साहूकार ऊंचे ब्याज पर कर्ज देते थे, वहीं अब बैंक, एनबीएफसी और फिनटेक कंपनियां आसान शर्तों पर घर, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के लिए पूंजी उपलब्ध करा रही हैं। यह आर्थिक समावेशन की दिशा में एक बड़ा कदम है। बचत से कर्ज तक भारत की अर्थव्यवस्था एक नए...

  • “नया भारत” उत्सव मनाता नहीं, उत्सव अभिनय करता है!

    खुशहाली, समृद्धि आखिर होती क्या है? खासकर उस देश के लिए जहां जीतने का शौर है जीतता दिखता है लेकिन भीतर से थका, खोखला है? कागज़ों पर, सोशल मीडिया पर, प्रेस कॉन्फ़्रेंसों और सरकारी चमक-दमक वाले आयोजनों में भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से दौड़ रही है। उसकी कूटनीति आत्मविश्वासी है, उसकी वैश्विक छवि दमक रही है। लेकिन इस चमक के नीचे क्या है? क्या थकान, हैरानी नहीं है? राष्ट्र की ऐसी थकान जो दुनिया के लिए ज़रूरत से ज़्यादा कर रहा है, पर अपने लिए महसूस करना भूल गया है। यही सवाल जैसे हवा में तैरता रहा — उस कौटिल्य...

  • फिर भी चक्का जाम!

    मंत्रियों और सरकार समर्थक विश्लेषकों के मुताबिक यह नए निवेश के लिए आदर्श समय है। मगर हकीकत यह है कि अब तक निवेश- उत्पादन- रोजगार सृजन- उपभोग एवं वृद्धि और उससे प्रेरित नए निवेश का चक्का हिला तक नहीं है। संभव है कि नरेंद्र मोदी सरकार के अंदर सचमुच यह समझ हो कि अर्थव्यवस्था में गति भरने के लिए वह जो कर सकती थी, कर दिया है। केंद्रीय मंत्री यह कहते सुने गए हैं कि अब यह निजी क्षेत्र पर है कि सरकार की बनाई अनुकूल स्थितियों के अनुरूप आचरण वह करे। निजी क्षेत्र से उम्मीद जोड़ी गई है कि...

  • आरएसएस का अर्थ-चिंतन

    संघ के अर्थ-समूह में कही गई बातें मोदी सरकार की आर्थिक सफलता के दावों का सिरे से खंडन करती हैँ। कहा जा सकता है कि ये भारत की जमीनी माली हालत का उचित वर्णन हैं। हालांकि ये बातें नई नहीं हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘अर्थ समूह’ की बैठक में वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने लगभग 70 स्लाइड्स के जरिए दिखाया कि देश की आर्थिक प्राथमिकताएं किस हद तक गलत दिशा में हैं। उन्होंने बढ़ती आर्थिक गैर-बराबरी की आलोचना की और भारत में प्रति व्यक्ति आय की निम्न दर की ओर ध्यान खींचा। 91 वर्षीय जोशी ने ग्रोथ केंद्रित...

  • अपराध की जड़ें कहां

    अध्ययनकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे कि अपराध का सीधा ताल्लुक आर्थिक गैर-बराबरी से है। उनका निष्कर्ष है कि आर्थिक विषमता में हर एक प्रतिशत वृद्धि पर अपराध की दर में आधा फीसदी बढ़ोतरी होती है। अपने देश में बढ़ते अपराध की जड़ों की तलाश करनी हो, तो देश की अर्थव्यवस्था के स्वरूप पर गौर करना चाहिए। ये बात फिर से एक अध्ययन से साबित हुई है। अध्ययन आईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने किया। वे इस नतीजे पर पहुंचे कि अपराध का सीधा ताल्लुक बढ़ रही आर्थिक गैर-बराबरी से है। उनका निष्कर्ष है कि विषमता में हर एक प्रतिशत वृद्धि पर...

  • भारत की डेड इकोनॉमी: ट्रंप

    नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ लगातार दूसरे दिन नाराजगी जाहिर की। भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने और रूस से कारोबार करने की वजह से जुर्माना लगाने की घोषणा के एक दिन बाद गुरुवार को कहा कि भारत की इकोनॉमी डेड हो गई है। उन्होंने भारत के साथ साथ रूस की इकोनॉमी को भी डेड बताया। इस डेड इकोनॉमी के विवाद के बीच शुक्रवार, एक अगस्त से भारत के उत्पादों पर अमेरिका में 25 फीसदी टैरिफ लगने लगेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार, 30 जुलाई को इसकी घोषणा की थी। अभी भारत के उत्पादों पर...

  • बढ़ती हुई चुनौतियां

    केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने अपनी ताजा मासिक समीक्षा रिपोर्ट में आगाह किया है कि कर्ज लेने की रफ्तार धीमी है और निजी निवेश सुस्त बना हुआ है। इनका असर भारत की आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियां बढ़ रही हैं और अच्छी बात है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय उससे ना सिर्फ वाकिफ है, बल्कि उसने अपना आकलन देश को बताया भी है। अपनी ताजा मासिक समीक्षा रिपोर्ट में उसने आगाह किया है कि कर्ज लेने की रफ्तार धीमी है और निजी निवेश सुस्त बना हुआ है। इनका असर भारत की आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है।...

  • पुराना पड़ गया फॉर्मूला?

    आसान शर्तों पर ऋण की उपलब्धता बढ़ा कर अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की भारतीय रिजर्व बैंक की कोशिशें कामयाब नहीं हुई है। मनी सप्लाई बढ़ाने के कदमों का क्रेडिट ग्रोथ पर ना के बराबर असर हुआ है। यह समझ अब गलत साबित हो रही है कि बैंकों के पास ऋण देने के लिए अधिक नकदी उपलब्ध होने पर आर्थिक वृद्धि दर तेज होती है। मान्यता है जब बैंक आसान शर्तों पर कर्ज देते हैं, तो लोग ऋण लेकर टिकाऊ उपभोक्त सामग्रियों या मकान आदि की अधिक खरीदारी करते हैं। इससे बढ़ी मांग के कारण उद्योगपति निवेश बढ़ाते हैं, जिससे आर्थिक...

  • महाकुंभ का असर अर्थव्यवस्था पर नहीं दिखा

    वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़े आ गए हैं। भारत सरकार के सांख्यिकी विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इस वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के बढ़ने की दर 6.5 फीसदी रही। इसके साथ ही यह भी आंकड़ा आया कि पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2025 के बीच जीडीपी बढ़ने की दर 7.4 फीसदी रही। यह आंकड़ा एक साल पहले यानी जनवरी से मार्च 2024 की विकास दर 8.4 फीसदी से एक फीसदी कम रही। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक ज्यादातर सेक्टर में गिरावट रही। ध्यान रहे उससे पहले के वित्त...

  • भारत की आर्थिकी पर अमेरिकी टैरिफ का होगा असर

    भारत को यूरोपीय संघ, आसियान और मध्य पूर्व जैसे वैकल्पिक बाजारों पर ध्यान देना चाहिए। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को तेज करना महत्वपूर्ण होगा। आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी पहलों को मजबूत करके घरेलू उत्पादन और खपत को बढ़ावा देना चाहिए। छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए सब्सिडी, कर राहत और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को लागू करना चाहिए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा घोषित “पारस्परिक टैरिफ” (रेसीप्रोकल टैरिफ) नीति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। इस नीति के तहत, भारत पर 27% का टैरिफ लगाया गया है, जबकि अन्य देशों जैसे चीन (34%), वियतनाम (46%), और यूरोपीय संघ...

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