फिर जोखिम क्यों उठाएं?
रेंटियर अर्थव्यवस्था में, जिनके पास रियल एस्टेट या वित्तीय संपत्तियां हैं, उनकी आमदनी तेजी से बढ़ती है, जबकि श्रम आधारित तबकों के लिए अवसर सिकुड़ते हैँ। भारत में फिलहाल यही हो रहा है। भारत का कॉरपोरेट सेक्टर अब मुनाफे के लिए औद्योगिक या कारोबारी कार्यों पर निर्भर नहीं रह गया है। बल्कि उसका ध्यान उन माध्यमों में निवेश करने पर ज्यादा है, जिन्हें ‘रेंटियर’ अर्थव्यवस्था (किराया/ ब्याज, शेयर बाजार लाभांश, ब्याज, सट्टा बाजार) का हिस्सा माना जाता है। एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित आय कर रिटर्न के 2012-13 से 2023-24 तक के आंकड़ों के विश्लेषण से जाहिर हुआ है कि...