एक बबूले का फूटना

सत्ताधारी नेताओं ने जोर-शोर से यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स का प्रचार दुनियाभर में किया। लेकिन ये यूनिकॉर्न अब हांफते दिखाई दे रहे हैं। वहां नौकरियां जा रही हैं और कंपनियां लड़खड़ा रही हैं।

आर्थिकी भी अपने आप चल रही

ऐसा नहीं है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष की राजनीति स्वचालित मोड में आ गई है तो सरकार खुल कर और जम कर काम कर रही है। सरकार का काम भी स्वचालित मोड में चल रहा है।

ये कैसी आत्म-निर्भरता?

इस महीने रोजगार की तलाश से निराश होकर 14 लाख लोगों ने अपने को इस बाजार से अलग कर लिया। इस तरह भारत के श्रम बाजार में मौजूद लोगों की संख्या 39 करोड़ 60 लाख रह गई है।

महंगाई के दुष्चक्र में विकास

पैसे पहुंचाने का एक तरीका यह है कि उत्पाद शुल्क में कमी करके तेल की खुदरा कीमतों को बढ़ने से रोका जाए। दूसरा तरीका सरकारी खर्च बढ़ाने और रोजगार पैदा करने का है।

आर्थिक बदहाली का दौर

हकीकत अब रूस के भी सामने है कि यूक्रेन पर हमले के बाद लगाए गए बेहद सख्त प्रतिबंधों का उसकी अर्थव्यवस्था पर कितनी गंभीर मार पड़ रही है।

यूपी की इकोनॉमी एक ट्रिलियन की बनेगी!

देश की अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डॉलर की बनाने की चर्चा इन दिनों बंद हो गई है। कोरोना वायरस की महामारी शुरू होने से थोड़ा पहले ही यह चर्चा बंद हो गई थी

आए बड़े विकट दिन

अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि जो हालात बन रहे हैं, उनकी वजह से धनी देशों में रोजमर्रा की जिंदगी मंहगी होगी।

कंगाली में आटा गीला

ज्यादा दिन नहीं बीते, जब भारत सरकार ने बहुत जोश के साथ कहा कि अगले साल विकास दर आठ से साढ़े आठ फीसदी रहेगी। भारत की ओर से आर्थिक सर्वेक्षण में यह बात कही गई थी।

भारत की दो तस्वीरें

अब अगर एक बहुराष्ट्रीय कंपनी सरकार को मनरेगा जैसे स्कीम पर न सिर्फ चुस्ती से अमल, बल्कि उसके विस्तार का सुझाव दे, तो देहाती इलाकों में हालात कैसे बन गए हैं, इसका अंदाजा लगाया गया जा सकता है।

खुशफहमी के आंकड़े

केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने सत्ता पक्ष और उसके पक्षधर मीडिया को खुशफहमी पालने और फैलाने का एक आंकड़ा दिया है।

शेयर बाजार मे बाजीगरी

सन् 2021 की हैरान करने वाली बात यह कि देश की अर्थव्यवस्था गिरती हुई और वायरस की महामारी का संकट भारी फिर भी शेयर बाजार की तेजी बरकरार।।

पचास साल का सफर

पिछले तीन दशकों में बांग्लादेश ने जो राह चुनी, उसका नतीजा है कि कोरोना महामारी से पहले तक अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से फल-फूल रही थी। उसकी सालाना आर्थिक वृद्धि दर आठ फीसदी थी।

आर्थिकी की असलियत क्या?

इन दिनों चारों तरफ अर्थव्यवस्था की हरी-भरी तस्वीर पेश की जा रही है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के बीच आर्थिक विकास दर 8.4 फीसदी रही है

आर्थिकी उबरेगी या डूबेगी?

आगे क्या होगा के सामान्य जन की सोच में एक बड़ा सवाल आर्थिक है। लोग अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता में हैं।

चालू वित्त वर्ष में होगी 10% से ज्यादा वृद्धि

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि रिकॉर्ड खरीफ फसल, और रबी फसल की उज्ज्वल संभावनाओं को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि करने की उम्मीद है

और लोड करें