नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन में देरी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज को दूर करने के लिए 10 दिन का समय दिए जाने के बाद चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा बढ़ाई जा सकती है। आयोग अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने सुनवाई की अंतिम तारीख सात फरवरी और अंतिम मतदाता सूची जारी करने तारीख 14 फरवरी तय की थी। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा है, ‘लोकल लेवल पर लिस्ट लगाने, हर वोटर को रसीद देने आदि की प्रक्रिया लंबी है। इसमें जल्दबाजी नहीं कर सकते’। अधिकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन करना मौजूदा समय सीमा में मुश्किल है। इसलिए अतिरिक्त समय की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि अंतिम फैसला होना बाकी है।
गौरतलब है कि 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसीज नोटिस वाले सवा करोड़ मतदाताओं की सूची ग्राम पंचायत भवन, ब्लॉक कार्यालय और वार्ड कार्यालय में सार्वजनिक करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मतदाताओं को 10 दिन का समय देते हुए अदालत ने उनको जरूरी दस्तावेज जमा कराने को कहा था। इससे पहले एसआईआर के पहले चरण के बाद मसौदा सूची 16 दिसंबर को जारी हुई थी, जिसमें 58 लाख से कुछ ज्यादा नाम कटे थे।
जिन लोगों के नाम कटे थे उनके दावे और आपत्तियों की सीमा पहले 15 जनवरी तक थी, जिसे बढ़ा कर 19 जनवरी किया गया। अब सात फरवरी तक सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसीज नोटिस के तहत पश्चिम बंगाल के सवा करोड़ मतदाताओं को अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए एक और मौका दिया। अदालत ने कहा है कि वे 10 दिन में अपने दस्तावेज चुनाव आयोग को पेश करें।


