जेनेवा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जोर जबरदस्ती ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का इरादा छोड़ दिया है। उन्होंने कहा है कि वे ताकत के दम पर ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं करेंगे। ट्रंप ने हालांकि यह साफ कर दिया है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड चाहिए क्योंकि यह उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। ट्रंप चाहते हैं कि यूरोपीय देश अपने आप उनको यह क्षेत्र दे दें। उन्होंने कहा कि वे एक बर्फीला क्षेत्र मांग रहे हैं। अगर यूरोपीय देश यह दे देते हैं तो अमेरिका शुक्रगुजार होगा और नहीं देते हैं तो अमेरिका इसे याद रखेगा।
भारतीय समय के मुताबिक बुधवार की शाम सात बजे दावोस में विश्व आर्थिक मंच के सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दरियादिली दिखाने के अंदाज में कहा कि अमेरिका चाहता तो ग्रीनलैंड अपने पास रख सकता था क्योंकि उसने इसकी रक्षा की थी। ट्रंप ने कहा कि डेनमार्क तो छह घंटे में जर्मनी से हार गया था। उन्होंने ग्रीनलैंड पर कब्जे का विरोध करने के लिए डेनमार्क को अहसानफरामोश कहा।
दावोस में अपने भाषण की शुरुआत में ट्रंप ने कहा, ‘खूबसूरत दावोस वापस आकर अच्छा लग रहा है। यहां कई बिजनेस लीडर्स, कई दोस्त, कुछ दुश्मन और खास मेहमान मौजूद हैं’। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप गलत दिशा में जा रहा है। ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के सनग्लासेज का भी जिक्र और उसकी तारीफ करते हुए मजाक में पूछा कि आखिर ऐसा क्या हो गया है कि वह हर जगह इन्हें पहन रहे हैं? असल में मंगलवार को दावोस में भाषण देते समय मैक्रों ने नीले रंग के सनग्लासेस पहने थे। ट्रंप ने नाटो का भी जिक्र किया और कहा कि नाटो को अपना बजट बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हमेशा नाटो की मदद की थी लेकिन पता नहीं अमेरिका को जरुरत होगी तो नाटो से मदद मिलेगी या नहीं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम’ डिफेंस सिस्टम पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम ऐसा होगा कि यह कनाडा की भी रक्षा करेगा। ट्रंप ने कहा, ‘कनाडा को अमेरिका से बहुत सारी चीजें मुफ्त में मिलती हैं। उन्हें इसके लिए आभारी होना चाहिए, लेकिन वे नहीं हैं। मैंने कल उनके प्रधानमंत्री को देखा, वे बिल्कुल भी थैंकफुल नहीं लगे’। उन्होंने कहा, ‘कनाडा को हमारे प्रति आभार जताना चाहिए। कनाडा, अमेरिका की वजह से ही टिका हुआ है’।
गौरतलब है कि एक दिन पहले मंगलवार को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दावोस के अपने भाषण में अमेरिका को निशाना बनाया था और कहा था कि नियमों पर आधारित विश्व व्यवस्था का समय अब समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा था कि अब टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। कार्नी ने अपने भाषण में कहा था कि ताकत के दम पर विश्व व्यवस्था चलाने की कोशिश हो रही है। मंगलवार को ही फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने भी राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना की थी।
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.



