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तीन राज्यों में अन्य की भूमिका बढ़ेगी?

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दो-तीन एजेंसियों को छोड़ दें तो एक्जिट पोल के नतीजे सभी राज्यों में नजदीकी मुकाबला बता रहे हैं और त्रिशंकु विधानसभा बनने या किसी पार्टी को मामूली बहुमत मिलने की संभावना जता रहे हैं। ऐसे में कई राज्यों में छोटी पार्टियों यानी अन्य और साथ में निर्दलीय विधायकों की भूमिका अहम हो जाएगी। तभी एक्जिट पोल के नतीजे आने के साथ ही इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि कहां विशेष विमान किराए पर लिया गया है तो कहां रिसॉर्ट की बुकिंग हो रही है। खबर आई है कि कांग्रेस तेलंगाना के अपने विधायकों को कर्नाटक ले जा सकती है तो छत्तीसगढ़ में चार्टर प्लेन से विधायकों को रायपुर ले जाने की योजना है। छोटी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों से अभी से बातचीत शुरू हो गई है। कांग्रेस, भाजपा और तेलंगाना में बीआरएस ने अपने बागी उम्मीदवारों से संपर्क किया है। इसका मतलब है कि पार्टियां भी वास्तविक चुनाव नतीजे को लेकर संशय में हैं।

अन्य की भूमिका सबसे ज्यादा राजस्थान में देखने को मिल सकती है। ध्यान रहे कांग्रेस ने 2008 और 2018 में दोनों बार अन्य और निर्दलियों के समर्थन से सरकार बनाई थी। राजस्थान ऐसा राज्य है, जहां हमेशा कुछ छोटी पार्टियां जीतती हैं और बड़ी संख्या में निर्दलीय जीतते हैं। इस बार भी एक्जिट पोल के मुताबिक 16 से 18 निर्दलीय जीतेंगे। हालांकि यह संख्या 20 या उससे ज्यादा भी हो सकती है। अगर 20 सीटें अन्य या निर्दलीय जीतते हैं तो बची हुई 180 सीटों में बहुमत का एक सौ एक सीट का आंकड़ा आसान नही होगा। अगर किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता है तो अन्य और निर्दलीय की भूमिका बड़ी हो जाएगी। अगर किसी को मामूली बहुमत मिलता है तब भी इनकी बड़ी भूमिका होगी।

राजस्थान के बाद दूसरा राज्य जहां अन्य और निर्दलीय अहम भूमिका निभा सकते हैं वह राज्य तेलंगाना है। 119 विधानसभा वाले राज्य में बहुमत का आंकड़ा 59 सीट का है। ज्यादातर एक्जिट पोल में कांग्रेस को इस आंकड़े तक पहुंचते दिखाया गया है। लेकिन वहां भाजपा और एमआईएम दो पार्टियां ऐसी हैं, जो 12 से 15 सीटें जीत सकती हैं। अगर 15 सीटें अन्य और निर्दलीय के खाते में जाती हैं तो कांग्रेस और बीआरएस के बीच का अंतर कम होगा और तब इनकी जरूरत पड़ सकती है। पिछली बार मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों की मदद से सरकार बनाई थी। वह बहुमत से दो सीट पीछे रूक गई थी। इस बार भी कांटे के मुकाबले में अगर मामला अटकता है तो सपा, बसपा, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, विंध्य पार्टी और निर्दलीय विधायकों की जरूरत पड़ सकती है। छत्तीसगढ़ में वैसे तो सभी सर्वेक्षण कांग्रेस की जीत बता रहे हैं लेकिन कई सर्वेक्षण उसे मुश्किल से 46 के आंकड़े तक पहुंचते दिखा रहे हैं। अगर कांग्रेस 50 के आसपास पहुंचती है तो उसे सरकार बनाने और स्थिरता रखने के लिए अन्य की जरूरत पड़ेगी। राज्य में बसपा, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के जीतने वाला विधायकों की जरूरत पड़ सकती है।

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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