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सत्ता किसी की भी, खमीर लेफ्ट का ही!

अपन तो कहेंगे
अपन तो कहेंगे
सत्ता किसी की भी, खमीर लेफ्ट का ही!
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नमस्कार मैं हरिशकंर व्यास, भारत में कम्युनिस्ट छाप राजनीति ने देश का कबाड़ा करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रहे दिया है…निजी जीवन में सादगी का लबादा ओड़कर इन कम्युनिस्टों ने देश के सत्ता और सियासत गलियारे में ऐसे विचार और बौद्धिकता की बुनावट को गढ़ा है जिससे अलग सोचना या उससे बाहर निकल पाना कतई आसान नहीं…तभी कॉलम अपन तो कहेंगे के इस स्पेशल एडिशन के दूसरे एपिसोड में मेरे विचार का शीषर्क है…सत्ता किसी की भीखमीर लेफ्ट का ही!

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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