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नमस्कार मैं हरिशकंर व्यास, भारत में कम्युनिस्ट छाप राजनीति ने देश का कबाड़ा करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रहे दिया है…निजी जीवन में सादगी का लबादा ओड़कर इन कम्युनिस्टों ने देश के सत्ता और सियासत गलियारे में ऐसे विचार और बौद्धिकता की बुनावट को गढ़ा है जिससे अलग सोचना या उससे बाहर निकल पाना कतई आसान नहीं…तभी कॉलम अपन तो कहेंगे के इस स्पेशल एडिशन के दूसरे एपिसोड में मेरे विचार का शीषर्क है…सत्ता किसी की भी, खमीर लेफ्ट का ही!
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