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विजयादशमी के बाद अब राजनीति का समय

भाजपा और केंद्र सरकार के इकोसिस्टम से जुड़े लोग बता रहे हैं कि अगले दो हफ्ते देश की राजनीति के लिहाज से बहुत अहम होने वाले हैं। विजयादशमी बीतने के साथ ही सरकार की ओर से राजनीति तेज होने वाली है। इसका संकेत महानवमी के दिन संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखी चिट्ठी से मिला है। रीजीजू ने लिखा है कि महिला आरक्षण और परिसीमन के मसले पर लगभग सभी विपक्षी पार्टियों के साथ बातचीत हुई है। उन्होंने यह भी याद दिलाया है कि इन दोनों मसलों पर सरकार ने कांग्रेस के साथ कितनी बार बात की है। इस चिट्ठी का एक संकेत यह है कि सरकार अब लगातार चल रहे प्रदर्शनों से आगे बढ़ कर राजनीतिक फैसले कराने के आत्मविश्वास में है। कहा जा रहा है कि अगले 15 दिन में यानी विजयादशमी के बाद और दिवाली से पहले सारे बड़े फैसले होंगे। सरकार महिला आरक्षण में संशोधन और परिसीमन का बिल पास कराएगी और उसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की जाएगी।

उससे पहले सरकार के सूत्रों के हवाले से मीडिया में खबरें आ रही हैं कि 2029 का लोकसभा चुनाव आठ सौ सीटों का होगा। लेकिन क्या सचमुच ऐसा हो पाएगा? य़ह बड़ा सवाल है क्योंकि सरकार की सारी उम्मीद इस पर टिकी है कि डीएमके उसका समर्थन करेगी। लेकिन डीएमके के समर्थन के बाद भी कम से कम 20 सीटों की कमी हो रही है। दूसरी ओर कांग्रेस ने एकदम फैसला कर लिया है कि वह किसी हाल में परिसीमन के लिए तैयार नहीं होगी। परिसीमन अगर होता है तो कांग्रेस उसे अपनी राजनीति का अंत मान रही है। यह बात खुल कर कांग्रेस के बड़े नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कही है।

अशोक गहलोत ने परिसीमन को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार परिसीमन के जरिए सभी लोकसभा सीटों को इस तरह से बदलना चाह रही है कि वह कभी नहीं हारे। उन्होंने असम की मिसाल दी और कहा कि वहां भाजपा ने अपने हिसाब से परिसीमन कराया और उसका नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस साफ हो गई। सोचें, यह अशोक गहलोत के शब्द हैं कि ‘परिसीमन के कारण कांग्रेस साफ हो गई’। उन्होंने बताया कि 2026 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 21 सीटें जीती, जिसमें 20 मुस्लिम है। इसके बाद गहलोत ने कहा कि अगर परिसीमन होता है कि रूस और चीन की तरह भारत में भी भाजपा अगले 50 या सौ साल तक नहीं हटेगी। सवाल है कि अगर कांग्रेस यह लाइन पकड़ती है तो क्या दूसरी सहयोगी पार्टियां इससे अलग हट कर भाजपा के साथ जाने की जोखिम उठाएंगी? यहां सवाल सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने का नहीं है। सीटें 543 से बढ़ कर आठ सौ हो जाएं, इसमें किसी को आपत्ति नहीं है। महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित हो जाएं इसमें भी किसी को आपत्ति नहीं हो सकती है। लेकिन कांग्रेस को लग रहा है कि भाजपा के शासन में रहते परिसीमन होता है तो कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के लिए कम से कम अभी जीतने का रास्ता बंद हो जाएगा।

By NI Political Desk

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