भारतीय जनता पार्टी में अभी जो स्थिति है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि कोई भी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व को चुनौती नहीं दे सकता है। यह भी थोड़ी दूर की कौड़ी है कि मोदी और शाह में अनबन है, जिसकी वजह से कैबिनेट में फेरबदल का फैसला टल रहा है। लोग बड़े दावे से कह रहे हैं कि भाजपा में पहले कभी फैसला करने में इतना समय नहीं लगता था और न इतनी हिचक दिखती थी। हो सकता है कि मोदी और शाह में कुछ मुद्दों पर असमहति हो लेकिन दोनों में झगड़ा है, इस वजह से मंत्रिमंडल में फेरबदल नहीं हो रहा है या शाह के करीबी नेताओं की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो जाएगी यह थोड़ी दूर की कौड़ी दिख रही है। लेकिन राजनीति में कभी भी और कुछ भी संभव है।
इन अटकलों के बीच भाजपा के अंदर की खींचतान सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की आठ सीटों पर बिल्कुल नए और कई गुमनाम से चेहरे तय किए गए। इससे पार्टी के कई नेता नाराज हैं। दो बार सांसद रहे और उत्तर प्रदेश में भाजपा की बहुजन राजनीति का बड़ा चेहरा रहे धर्मेंद्र कश्यप ने नाराजगी में पार्टी छोड़ दी है। वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। ऐसे ही पिछले दिनों ओडिशा के पार्टी के सांसद, पुराने नेता और केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने बिना नाम लिए पार्टी के कई नेताओं पर हमला किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ साजिश की जा रही है। लेकिन साथ यह भी कह दिया कि कितनी भी साजिश हो जाए वे सरकार नहीं छोड़ेंगे। सवाल है कि क्या उनसे सरकार छुड़ाने यानी इस्तीफा कराने का प्रयास हो रहा था?
इसी बीच केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन का इस्तीफा हो गया। कहा जा रहा है कि इस्तीफे के लिए कहा तो कई मंत्रियों को गया है लेकिन लोग इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। कई मंत्रियों ने कथित तौर पर कहा है कि अगर हटाना है तो प्रधानमंत्री खुद ही सरकार से हटा दें। अगर ऐसा है तो यह भाजपा की पिछले 12 साल की राजनीति में नई चीज है।
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