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ब्रजभूषण ने भाजपा को झुकाया

भारतीय जनता पार्टी ने ब्रजभूषण शरण सिंह को लोकसभा की टिकट नहीं दी थी। हरियाणा की महिला पहलवानों के कथित यौन शोषण को लेकर हुए विवाद की वजह से उनकी टिकट कट गई थी। उनकी जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को टिकट मिली और वे जीत भी गए। हालांकि उसके बाद भी ब्रजभूषण शरण सिंह की भाजपा से नाराजगी कम नहीं हुई। उन्होंने अयोध्या में राममंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में खुल कर कहा कि बड़े लोग इसमें शामिल हैं और वे नाम लेंगे तो विवाद हो जाएगा। इसके बाद उन्होंने राज्यसभा चुनाव के समय भी तेवर दिखाया, जिसकी वजह से ऐसा दिख रहा है कि भाजपा को उनके सामने झुक कर समझौता करना पड़ा है।

असल में राज्यसभा चुनाव के समय ब्रजभूषण शरण सिंह ने ऐसे संकेत दिए कि वे समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ सकते हैं। अपने विधायकों की संख्या के लिहाज से सपा दो सीटें जीतने की स्थिति में थी। उन दो सीटों पर रामगोपाल यादव और रिलंयास समूह से जुड़े धनराज नथवानी को टिकट दे दी गई। इसके बाद सपा के पास 27 वोट बच रहे थे और करीब 10 वोटों का इंतजाम करना था। तभी कहा गया कि ब्रजूभषण सिंह तीसरे उम्मीदवार हो सकते हैं। लेकिन बाद में वे चुनाव नहीं लड़े। सोशल मीडिया में सपा के इकोसिस्टम से जुड़े लोगों ने इसके लिए उनकी बड़ी आलोचना भी की। अब भाजपा ने उनकी नाराजगी दूर करने के लिए उनको प्रदेश कार्यकारिणी का सदस्य बनाया है। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में पार्टी उनको नाराज रखने का रिस्क नहीं ले सकती है। दूसरी ओर भाजपा की तरफ से कहा जा रहा है कि निचली अदालत ने ब्रजभूषण शरण सिंह को बाइज्जत बरी कर दिया है। इसलिए उनको कार्यकारिणी में शामिल करने में कुछ भी गलत नहीं है।

By NI Political Desk

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