पश्चिम बंगाल में सरकार बनने के बाद बड़े धूमधड़ाके से बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री बंगाल पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार थी तो उनको राज्य में नहीं आने दिया जाता था। उन्होंने यह भी कहा कि अब सरकार बदल गई है और लोगों का मन बदलना चाहिए। सोचें, बंगाल में लोगों का मन बदला तभी तो सरकार बदली। यह बात वे भी समझ रहे हैं। लेकिन मन बदलने की बात उन्होंने दूसरे संदर्भ में कही। बाद में खुल कर भी उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि दुर्गापूजा के समय जो लोग मांस, मछली का सेवन करते हैं वे पाखंड करते हैं। उन्होंने लोगों से मांस, मछली छोड़ने को कहा। यह बात मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में उन्होंने कही।
इसका कितना बड़ा नुकसान हुआ है उसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि बंगाली लोगों को शांत करने के लिए भाजपा के सभी प्रदेश नेताओं ने धीरेंद्र शास्त्री पर हमला किया। उनके बारे में ऐसी बातें कहीं, जो आज तक किसी भाजपा विरोधी पार्टी के लोगों ने भी नहीं कही होगी। जो डैमेज उन्होंने किया उसे कंट्रोल करने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को माता के एक मंदिर में जाकर मछली का भोग लगवाना पड़ा और वही बैठ कर मछली खानी पडी। इसके वीडियो और तस्वीरें भाजपा की ओर से वायरल कराई गईं। धीरेंद्र शास्त्री से पहले विश्व हिंदू परिषद के कुछ नेताओं ने भी मांस, मछली न खाने की सलाह दी थी। इसका बहुत विरोध हो रहा है और बंगाली लोग इसे अपनी संस्कृति पर हमला मान रहे हैं। भाजपा को चिंता हो गई है कि राजनीतिक रूप से कमजोर हो रही ममता बनर्जी को इस विवाद से नई संजीवनी मिल गई है। ममता ने भाजपा को बंगाल विरोधी बताना शुरू कर दिया है। अगले महीने होने वाले दो सीटों के उपचुनाव पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
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