राहुल गांधी कह रहे हैं कि 2024 का लोकसभा चुनाव अवैध था। उसे अवैध बताने के लिए वे एक आकंड़ा दे रहे हैं। लेकिन मुश्किल यह है कि वह आंकड़ा किसी को समझ में नहीं आ रहा है या कम से कम कांग्रेस उसे समझा नहीं पा रही है। कई टेलीविजिन डिबेट्स में यह सवाल उठा कि राहुल कह रहे हैं कि भाजपा और विपक्ष के बीच तीन फीसदी वोट का अंतर था और अब 15 फीसदी नाम कटे हैं तो इस वजह से चुनाव कैसे अवैध हो गया? एंकर सवाल पूछ रहे हैं और कोई भी व्यक्ति संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहा है। कांग्रेस के बड़े नेताओं, खास कर संचार विभाग के तीनों बड़े नेताओं जयराम रमेश, पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत को यह बात लोगों को समझानी चाहिए कि आखिर राहुल गांधी इन दो आंकड़ों से क्या संदेश देना चाहते हैं। तीन फीसदी का अंतर है और 15 फीसदी वोट कट गए, इस बात को इसी रूप में देखने पर कुछ समझ में नहीं आएगा। लेकिन अगर कुछ अन्य बयानों के साथ इसे मिला कर देखेंगे तब समझ में आएगा कि राहुल कैसी डीप कॉन्सपिरेसी की बात कर रहे हैं।
एक बयान मल्लिकार्जुन खड़गे का है, जिसमें उन्होंने कहा कि जब चुनाव आयोग की ग़डबड़ी पकड़ी जाने लगी तब एसआईआऱ शुरू कर दिया। क्या गड़बड़ी पकड़ी जाने लगी? इससे पीछे जाएं तो महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के समय और उसके बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मतदान समाप्त होने के बाद मतदान प्रतिशत बहुत ज्यादा बढ़ रहा है। इस आधार पर कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने चुनाव आय़ोग की मदद से फर्जी मतदाता बनाए हैं और उनके वोट ईवीएम में डाले जाते हैं, जिससे मतदान प्रतिशत बढ़ता है। तीसरी बात राहुल गांधी के बयान की यह बारीकी है कि भाजपा के लोकसभा सांसदों का चुनाव अवैध है। यानी कांग्रेस अपने वोट से जीती है पर भाजपा फर्जी वोटों के सहारे जीती है।
इसी साजिश की बात राहुल कह रहे हैं। उनके हिसाब से चुनाव आयोग ने फर्जी मतदाता बनाए और उनके वोट भाजपा को डलवा कर चुनाव जिताया। फिर जब यह बात खुलने लगी तो एसआईआर के जरिए उनका नाम डिलीट कर दिया। इससे साढ़े 13 करोड़ लोगों के वोट काटने के आरोपों का पूरा फोकस ही बदल जाएगा। तभी कांग्रेस और राहुल गांधी अब वोट चोरी के साथ साथ चुनाव चोरी की बात भी करने लगे हैं। एक लाइन में अगर राहुल की ओर से लगाए जा रहे साजिश के आरोप को समझना हो तो वे कह रहे हैं कि विपक्ष तीन फीसदी वोट के अंतर से हारा, जबकि चुनाव आयोग ने तीन फीसदी से ज्यादा फर्जी वोट भाजपा उम्मीदवारों के लिए करा दिया।
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