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राहुल की रिहाई से राहत

सुल्तानपुर की अदालत ने अमित शाह की मानहानि के मामले में राहुल गांधी को बरी कर दिया। मानहानि का यह मामला आठ साल पुराना है। 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने अमित शाह पर टिप्पणी की थी। उस समय अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। राहुल गांधी ने कहा था कि भाजपा ने ऐसे नेता को अध्यक्ष बनाया है, जिसके ऊपर हत्या का आरोप है। उन्होंने कई बार इस बात को दोहराया था। राहुल ने दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि अमित शाह हत्या के आरोपी हैं। वे जस्टिस लोया की मौत के मामले का जिक्र कर रहे थे। गौरतलब है कि उस मामले में अमित शाह अदालत से बरी हो चुके हैं। लेकिन राहुल गांधी की इस टिप्पणी को लेकर भाजपा के एक कार्यकर्ता ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में मानहानि का केस कर दिया। उसका कहना था कि इससे भाजपा का अपमान हुआ है।

आठ साल की सुनवाई के बाद अदालत ने राहुल पर मानहानि का मामला खारिज कर दिया। यह दिख रहा था कि मुकदमा करने वाला दावा कर रहा था कि राहुल ने अमित शाह को हत्यारा कहा है, जबकि राहुल बार बार हत्या का आरोपी कह रहे थे। बहरहाल, उनकी रिहाई से भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों के नेताओं ने राहत की सांस ली है। अगर इस मामले में राहुल दोषी ठहरा दिए जाते और उनको सजा हो जाती फिर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ज्यादा आक्रामक हो जाती। राहुल गांधी ज्यादा सक्रिय हो जाते और कांग्रेस भाजपा विरोधी वोट को एकजुट करने लगती। मुस्लिम वोटों पर उसकी दावेदारी बढ़ जाती और फिर दलित वोट भी कांग्रेस की ओर रूझान दिखा सकता था। सपा को यह चिंता थी कि पहले से ही 180 सीटों की मांग कर रही कांग्रेस ज्यादा मोलभाव करने लगेगी। भाजपा को भी कांग्रेस की सक्रियता से ब्राह्मण वोट टूटने की चिंता है। तभी राहुल को बरी किया गया तो सबने राहत की सांस ली।

By NI Political Desk

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