ऐसा बहुत कम होता है कि एक बार सरकार गठन के बाद पांच साल के कार्यकाल में उसमें फेरबदल नहीं हो। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की दूसरी सरकार का गठन मार्च 2022 में हुआ था और अभी चार साल बाद तक इसमें कोई बड़ी फेरबदल नहीं हुई। एकाध मंत्रियों के विभागों में बदलाव या समायोजन की बात छोड़ दें तो कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। सोचें, योगी की पहली सरकार में कम से कम तीन बड़े बदलाव हुए थे। 2017 में सरकार गठन के बाद अगस्त 2019 में पहला बड़ा बदलाव हुआ था। कई मंत्री शामिल किए गए थे और कई लोगों के विभाग बदले गए थे। इसके बाद मई 2020 में सीमित बदलाव हुआ और 2021 के सितंबर में यानी 2022 के चुनाव से ठीक पहले बड़ा बदलाव हुआ था। दूसरी सरकार में इस तरह का एक भी बदलाव नहीं हुआ। अब कहा जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ की दूसरी सरकार का पहला और संभवतः अंतिम बदलाव होने जा रहा है।
ध्यान रहे इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने कई बार दिल्ली का दौरा किया। जितनी बार वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलते थे उतनी बार चर्चा होती थी कि लखनऊ लौटते ही फेरबदल करेंगे। लेकिन कर नहीं पा रहे थे। अब जानकार सूत्रों का कहना है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की सहमति से वे सरकार में फेरबदल करने वाले हैं। बीते शुक्रवार को लखनऊ में एक अहम बैठक हुई, जिसमें भाजपा और संघ के पदाधिकारी मौजूद थे। संघ की ओर से भाजपा के साथ समन्वय का काम देख रहे अरुण कुमार भी इस बैठक में शामिल हुए। कहा जा रहा है कि चुनाव को ध्यान में रखते हुए बदलाव होंगे। यूजीसी की नियमावली को लेकर सवर्ण जातियों के विरोध और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ माघ मेले में हुए घटनाक्रम का भी ध्यान रखा जाएगा। साथ ही कांशीराम को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सक्रियता को भी ध्यान में रखा जाएगा।


