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सुधा यादव को कर्नाटक भेजना दिलचस्प है

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत का क्या होगा यह बड़ा सवाल है। दलित समाज से आने वाले गहलोत केंद्रीय मंत्री थे, जहां से हटा कर उनको कर्नाटक राजभवन में भेजा गया था। अब राजभवन से उनकी विदाई हो रही है। क्या संगठन में कोई जिम्मेदारी मिलेगी? संसदीय बोर्ड में जगह मिल सकती है या फिर सरकार में लौटेंगे या कलराज मिश्र व अन्य नेताओं की तरह रिटायर कर दिए जाएंगे? इस सवाल का जवाब तो आने वाले दिनों में मिलेगा। लेकिन गहलोत की जगह सुधा यादव को भेजा जाना बहुत हैरान करने वाला है। मोदी जब हरियाणा के प्रभारी थे तभी उन्होंने सुधा यादव को महेंद्रगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया। अभी उनके बेटे सिद्धार्थ यादव को मीडिया टीम में रखा गया है।

भाजपा की अंदरुनी राजनीति की जानकारी रखने का दावा करने वाले लोग कह रहे थे कि कर्नाटक राजभवन में किसी ऐसे व्यक्ति को भेजा जाएगा, जो राज्य सरकार से टकराव बढ़ा सके। जगदीप धनखड़ या आरएन रवि जैसे किसी व्यक्ति को राज्यपाल बना कर भेजने की चर्चा था। लेकिन भाजपा ने सुधा यादव को भेजा। उनका ऐसा एक्सपोजर नहीं है और अभी तक के कामकाज में वे टकराव बढ़ाने वाली नेता के तौर पर भी नहीं जाती हैं। वे भाजपा संसदीय बोर्ड की सदस्य हैं लेकिन उस नाते उनकी कोई बड़ी भूमिका नहीं रही है। उन्होंने हरियाणा की राजनीति के अलावा भी देश के किसी दूसरे राज्य में कोई बड़ी राजनीतिक भूमिका नहीं निभाई है। तभी उनके जरिए भाजपा क्या मैसेज देना चाहती है यह किसी को समझ में नहीं आ रहा है। वे महिला हैं और ओबीसी समाज की हैं। इसके अलावा दूसरा कोई मैसेज समझना मुश्किल है। तभी सवाल है कि क्या इतने रैंडम तरीके से भाजपा किसी को कहीं का राज्यपाल बना देगी!

By NI Political Desk

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