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राज्यों के चुनाव को लेकर सस्पेंस

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है। वैसे तो पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में चुनाव फरवरी और मार्च में होने हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस बात की चर्चा थी कि चुनाव समय से पहले हो सकता है। अब फिर चर्चा है कि चुनाव समय पर ही होगा। बताया जा रहा है कि प्रशासनिक कारणों से केंद्र सरकार औऱ चुनाव आयोग दोनों चुनाव नवंबर में कराना चाहते थे। लेकिन अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद माहौल बिगड़ा है और भाजपा अब थोड़ा और समय चाहती है। असल में अयोध्या में चढ़ावा चोरी के बाद राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और भाजपा तीनों को लेकर धारणा बिगड़ी है। जिन लोगों की भगवान राम में अटूट आस्था है उनकी आस्था भी मंदिर की व्यवस्था से टूटी है। इसका असर यह हुआ है कि अयोध्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना कम हो गया है। इसकी कई रिपोर्ट आई है कि पहले के मुकाबले आधी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और उनमें भी आसपास के लोग ज्यादा हैं। इसके अलावा दूसरी खबर यह है कि मंदिर में चढ़ावा कम हो गया है। पहले जहां पांच सौ, दो सौ और एक सौ रुपए के नोट ज्यादा मिलते थे वहां अब 10, 20 और 50 रुपए के नोट ज्यादा मिल रहे हैं। इससे चढ़ावे की गिनती में भी समस्या हो रही है।

तभी कहा जा रहा है कि भाजपा अब चाहती है कि चुनाव समय पर हो। लेकिन सवाल है कि अगर प्रशासनिक कारणों से चुनाव नवंबर में कराने की जरुरत महसूस हो रही थी तो राजनीतिक कारणों से चुनाव कैसे टाला जा सकता है? प्रशासनिक कारण यह बताया जा रहा था कि चूंकि अगले साल शुरू में ही जनगणना आरंभ होनी है। उसके लिए सरकारी कर्मचारियों का प्रशिक्षण पहले ही शुरू हो जाएगा। ऐसे में जनगणना के समय चुनाव कराने के लिए कर्मचारियों की कमी पड़ सकती है। इसलिए कहा जा रहा था कि चुनाव नवंबर में हो जाएगा। वैसे भी विधानसभा का कार्यकाल छह महीने से कम बचा होता है तो चुनाव आयोग को किसी भी समय चुनाव कराने का अधिकार होता है। लेकिन क्या प्रशासनिक मजबूरी के बावजूद चुनाव समय पर ही होगा? इसका पता आने वाले दो तीन महीनों में चलेगा।

लेकिन इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुनावी राज्यों में दौरा शुरू होने वाला है। उत्तर प्रदेश में तो खैर उनका अपना लोकसभा चुनाव क्षेत्र भी है इसलिए वे वहां जाते रहते हैं। लेकिन इसी महीने वे पंजाब के दौरे पर जाने वाले हैं, जहां हजारों करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। चुनावी राज्यों का दौरा और हजारों करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास तभी होता है, जब चुनाव नजदीक आते हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे के लिए 15 और 17 जुलाई की तारीख प्रस्तावित है। इनमें से किसी तारीख को वे पंजाब दौरे पर जाएंगे। इससे एक बार फिर समय से पहले चुनाव की अटकलें तेज हो गई हैं। यह भी ध्यान रखने की जरुरत है कि समय से पहले चुनाव की चर्चा पंजाब से ही शुरू हुई थी, जहां से खबर आई थी कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल नहीं चाहते हैं कि पंजाब का चुनाव उत्तर प्रदेश के साथ हो। उनको लग रहा था कि अगर दोनों राज्यों के चुनाव साथ होते हैं तो उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व का जो मुद्दा बनेगा उसका असर पंजाब पर भी होगा। इसके अलावा दूसरा कारण यह था कि उनको गोवा में भी चुनाव लड़ना है तो अगर दोनों चुनाव अलग अलग होते तो उनको सुविधा होती। यह देखना दिलचस्प होगा कि अगर चुनाव आयोग समय से पहले चुनाव की तैयारी नहीं करता है तो क्या केजरीवाल पंजाब विधानसभा भंग कराएंगे?

By NI Political Desk

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