कॉकरोच जनता पार्टी के तीन नेताओं आशुतोष रांका, सौरव दास और अभिजीत दीपके में क्या फर्क है? एक फर्क तो यह है कि दीपके ने सीजेपी की स्थापना की थी और रांका व दास बाद में जुड़े थे। लेकिन इसके अलावा भी तीनों की हैसियत और कुछ अन्य तरह के फर्क भी हैं तभी जिस मामले में रांका और दास को जमानत नहीं मिल रही है उसी मामले में दीपके को आनन फानन में जमानत मिल गई थी। इससे जाहिर होता है कि भारत का संविधान भले कहता हो कि कानून के समक्ष सभी समान हैं लेकिन कुछ लोग ज्यादा समान होते हैं।
गौरतलब है कि 10 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद दीपके, रांका और दास तीनों ने एक ही बॉन्ड पर दस्तखत किए थे। तभी 13 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने गए आशुतोष रांका और सौरव दास को पुलिस ने गिरफ्तार किया तो उनके ऊपर बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। इस आरोप में वे आठ दिन से जेल में हैं। लेकिन 16 अक्टूबर को अभिजीत दीपके ने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया और पाबंदी के बावजूद कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने गए। उनको धारा 163 के उल्लंघन और बेल बॉन्ड की शर्तें तोड़ने के आरोप में हिरासत में लिया गया। लेकिन अगले दिन यानी 17 अक्टूबर को वे जमानत पाकर छूट भी गए। सवाल है कि पुलिस ने जिस तरह से दीपके को छोड़ा वैसे ही सौरव दास और रांका को क्यों नहीं छोड़ दिया?
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