भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी देश की सबसे बड़ी सरकारी कंपनियों में से एक है। इसके पास देश के करोड़ों लोगों का पैसा है। लोग अपना पेट काट कर बीमा करा रहे हैं। लेकिन एलआईसी का पैसा लगातार संदिग्ध कंपनियों में लगाया जा रहा है। इस बात की खबरें दबे छिपे ढंग से पहले भी आती थी कि सरकार सार्वजनिक उपक्रमों जैसे एलआईसी आदि के पैसे से शेयर बाजार को नियंत्रित करती है। लेकिन एक के बाद एक ऐसी खबरें सामने आने भी लगी हैं।
ताजा खबर है कि एलआईसी ने राजेश एक्सपोर्ट में 10.8 फीसदी यानी करीब 11 फीसदी शेयर खरीदा है। पिछले 10 साल में इस कंपनी में एलआईसी का निवेश पांच गुना बढ़ा है। सोचें, एक रिपोर्ट बताती है कि इस 10 साल की अवधि में म्युचुअल फंड कंपनियों ने राजेश एक्सपोर्ट में लगभग जीरो पैसा लगाया है। यानी जो पेशेवर लोगों की सलाह से काम करती हैं उन कंपनियों ने राजेश एक्सपोर्ट में पैसा नहीं लगाया पर एलआईसी का निवेश पांच गुना हो गया। अब घोटाला खुला है कि गुजरात के रहने वाले राजेश मेहता की इस कंपनी ने 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की गड़बड़ी की है। जिस दिन यह खबर आई उस दिन राजेश एक्सपोर्ट का शेयर पांच फीसदी और एलआईसी का एक फीसदी गिरा। ध्यान रहे इससे पहले ऐसे ही एलआईसी ने लगातार अडानी की कंपनी में अपना निवेश बढ़ाया था। हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट आने के बाद उसके शेयरों में बड़ी गिरावट हुई और इसका खामियाजा एलआईसी के करोड़ों बीमाधारकों और निवेशकों को उठाना पड़ा था।


