यह गजब कोलकाता में हुआ। मंगलवार को ममता बनर्जी दिल्ली में थीं। उनके भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी भी दिल्ली में थे। पश्चिम बंगाल की पुलिस, प्रशासन को यह बात पता थी। सीआईडी ने विधायकों के जाली दस्तखत के मामले में अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन उन्होंने बता दिया था कि वे दिल्ली में हैं। तभी उनको नौ जून की शाम तक हाजिर होने को कहा गया था। फिर भी नौ जून को दिन में सीआईडी की टीम हरीश चंद्र मुखर्जी लेन में स्थित ममता बनर्जी के पैतृक आवास पर पहुंच गई। पहले तो ममता के परिवार के लोगों और पार्टी के लोगों ने रोका लेकिन जब बड़ी संख्या में पुलिस बुला ली गई तो वे नहीं रोक पाए।
अब सवाल है कि ममता बनर्जी के आवास और उससे लगे पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में सीआईडी की टीम क्या खोजने गई थी? बताया गया कि मामला विधायकों के जाली दस्तखत का है। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने आरोप लगाया है कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता विपक्ष चुने जाने के जिस प्रस्ताव की कॉपी स्पीकर को दी गई है उस पऱ उनके दस्तखत जाली हैं। अगर ऐसा है तो सीआडी दोनों के असली दस्तखत लेकर हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से दस्तखत का मिलान कर ले और आगे की कार्रवाई करे। लेकिन उसकी बजाय पुलिस ममता के घर और केंद्रीय कार्यालय पर छापा मारने गई। वहां पुलिस को क्या मिलेगा? क्या वहां जाली दस्तखत कराने की कोई रिकॉर्डिंग रखी गई होगी? जाहिर है पुलिस कुछ और खोजने गई थी। विपक्ष के नेताओं के यहां कोई भी आधार बना कर इस तरह की तलाशी बहुत खराब समय का संकेत है।


