गुजरात के नया राज्य बनने के बाद यह पहली बार होने जा रहा है कि राज्यसभा में गुजरात से विपक्षी पार्टियों का कोई भी प्रतिनिधि नहीं होगा। लोकसभा में तो कई बार हो चुका है और कई दूसरे राज्यों से भी हो चुका है। अभी ही कई राज्य हैं, जहां से लोकसभा में राज्य का कोई प्रतिनिधि नहीं है। मध्य प्रदेश की सभी 30 सीटें भाजपा के पास ही हैं। लेकिन राज्यसभा में आमतौर पर ऐसा कम होता है। गौरतलब है कि नए राज्य के रूप में गुजरात का जन्म 1960 में हुआ था। उसके बाद 66 साल में पहली बार ऐसा हो रहा है कि विपक्ष का कोई प्रतिनिधि राज्यसभा में नहीं होगा।
कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल 21 जून को रिटायर होंगे उसके बाद राज्यसभा में गुजरात का कोई विपक्षी सांसद नहीं होगा। गुजरात विधानसभा चुनाव में 2017 में कांग्रेस ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। उसके दो राज्यसभा सांसद थे। लेकिन कोराना के समय अहमद पटेल के निधन के बाद वह सीट उपचुनाव में भाजपा के खाते में चली गई और 2020 में बने शक्ति सिंह गोहिल अब रिटायर हो रहे हैं। मौजूदा विधानसभा में ऐसी स्थिति नहीं है कि विपक्ष कोई सीट जीत सके। आम आदमी पार्टी के कारण पिछले चुनाव में कांग्रेस को 13 फीसदी वोट का नुकसान हुआ और पहली बार ऐसा हुआ कि वह मुख्य विपक्षी पार्टी नहीं बन पाई उसे सिर्फ 17 सीटें मिलीं। तभी इस बार राज्यसभा की सभी चारों सीटें भाजपा के खाते में चली गईं। गुजरात में तो लगभग सभी सीटें भाजपा के पास हैं लेकिन पंजाब में तो सिर्फ दो विधायक हैं फिर भी छह राज्यसभा सांसद हो गए हैं। भारत को चमत्कार की भूमि ऐसे ही नहीं कहा जाता है!
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