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जगन क्या कांग्रेस के साथ आएंगे

आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के सुर बदल रहे हैं। वे भाजपा या एनडीए के साथ कभी नहीं रहे हैं लेकिन जब वे सरकार में थे तब केंद्र की भाजपा सरकार को मुद्दों पर आधारित समर्थन देते रहे। उन्होंने केंद्र की सरकार के साथ सद्भाव बना कर रखा। 2024 के चुनाव में हार कर सत्ता से बाहर होने के बाद भी भाजपा के साथ उनका सदंभाव बना रहा। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि वह सद्भाव खत्म हो रहा है और अगले चुनाव की तैयारियां करते हुए उनको लग रहा है कि भाजपा और एनडीए के साथ सद्भाव दिखाने से नुकसान होगा। ध्यान रहे आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ टीडीपी का भाजपा के साथ तालमेल है।

सो, जगन मोहन रेड्डी ने सुर बदल लिए हैं। उन्होंने सबसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त के मसले पर विपक्ष के साथ सुर मिलाया है। जगन ने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए लाए गए सरकार के विधेयक का समर्थन करना उनकी भूल थी। गौरतलब है कि 2023 में यह कानून बना था और उस समय जगन की पार्टी ने सरकार का साथ दिया था। सो, अब सवाल है कि जगन क्या कांग्रेस के साथ जा सकते हैं?

हालांकि राज्य में कांग्रेस का कोई आधार नहीं है। परंतु दक्षिण के पांच में से चार राज्यों में कांग्रेस की सरकार है। कर्नाटक, केरल और तेलंगाना में कांग्रेस का मुख्यमंत्री है, जबकि तमिलनाडु में कांग्रेस टीवीके सरकार में शामिल है। आंध्र प्रदेश में भी जगन मोहन रेड्डी की बहन वाईएस शर्मिला कांग्रेस की कमान संभाल रही हैं। अगर परिवार में सहमति बनती है और जगन मोहन रेड्डी पुरानी सारी कड़वाहट भूल कर कांग्रेस में लौटते हैं तो कांग्रेस के लिए बहुत अच्छा होगा। लेकिन मुश्किल यह है कि आंध्र प्रदेश के लोग अब भी राज्य के बंटवारे का दोष कांग्रेस पर डालते हैं। तभी पिछले तीन विधानसभा और तीन लोकसभा चुनावों में राज्य में कांग्रेस का खाता नहीं खुला है। क्या जगन मोहन रेड्डी ऐसी स्थिति में कांग्रेस के साथ जाने की जोखिम उठा सकते हैं?

By NI Political Desk

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