नवजोत सिंह सिद्धू की पंजाब के पटियाला जेल से रिहाई हो गई है। करीब तीन दशक पुराने एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनको एक साल की सजा सुनाई थी। सजा पूरी होने से 49 दिन पहले उनकी रिहाई हो गई है। अब लाख टके का सवाल है कि कांग्रेस पार्टी उनका क्या करेगी? सिद्धू की राजनीति के चलते पंजाब में कांग्रेस को खासा नुकसान हुआ। उनकी पहले कैप्टेन अमरिंदर सिंह से नहीं बनी और बाद में चरणजीत सिंह चन्नी से भी नहीं बनी। वे अपने को पंजाब कांग्रेस का सबसे मजबूत सत्ता केंद्र मानते रहे क्योंकि उनको प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी का समर्थन था। लेकिन समय का चक्र ऐसा घूमा कि वे विधानसभा का चुनाव हार गए और फिर जेल जाना पड़ा।
अब जबकि वे जेल से छूट गए हैं तो उनकी उपयोगिता को लेकर चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा अब भी उनके प्रति सद्भाव रखते हैं। तभी जब 26 जनवरी को उनकी रिहाई की चर्चा हुई थी तब राहुल गांधी ने श्रीनगर में भारत जोड़ो यात्रा के समापन कार्यक्रम में उनको न्योता दिया था। हालांकि तब उनकी रिहाई नहीं हो सकी थी। कांग्रेस के कई नेता मान रहे हैं कि सिद्धू की लोकप्रियता अब भी कायम है और उनकी जैसी वक्तृता वाला नेता भी कांग्रेस के पास नहीं है। लेकिन मुश्किल यह है कि मौजूदा अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के साथ सिद्धू कैसे काम करेंगे? वे अपनी स्वतंत्र राजनीति करना चाहेंगे। सो, अगले कुछ दिन तक सिद्धू की राजनीति पर नजर रखने की जरूरत है। उनके पास आम आदमी पार्टी में जाने का विकल्प भी है और भाजपा में वापसी का भी विकल्प है।
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