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एथलीटों को कम उम्र से ही स्पोर्ट्स साइंस अपनाना चाहिए: डोला बनर्जी

दो बार की ओलंपियन और अर्जुन पुरस्कार विजेता तीरंदाज डोला बनर्जी का मानना है कि अगर यह सुनिश्चित किया जाए कि एथलीट कम उम्र से ही स्पोर्ट्स साइंस अपनाएं, तो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के पदकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी होगी।

साई एनसीओई नारनपुरा में पूर्व रिकर्व तीरंदाज ने कहा हमारे समय में न्यूट्रिशनिस्ट, साइकोलॉजिस्ट और मसाज करने वाले जैसी सुविधाएं नहीं थीं। मेरे करियर के आखिरी दौर में हमारे रूटीन में मेडिटेशन को शामिल किया गया था। उस समय हमें ये चीजें गैर-जरूरी लगती थीं, लेकिन आज प्रतिस्पर्धी खेलों में स्पोर्ट्स साइकोलॉजी और न्यूट्रिशन जैसी चीजें बहुत जरूरी हैं।

ये चीजें एथलीटों की ट्रेनिंग का बचपन से ही हिस्सा होनी चाहिए; इन सुविधाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना होगा।

डोला ने मौजूदा एथलीटों को आधुनिक सपोर्ट सर्विस का बेहतर इस्तेमाल करने की सलाह देते हुए कहा अपनी रोजमर्रा की प्रैक्टिस में इन सपोर्ट सर्विस को शामिल करना एथलीटों की जिम्मेदारी है। आज सिर्फ़ प्रैक्टिस काफी नहीं है। अगर आप दिन में सात घंटे प्रैक्टिस कर रहे हैं, तो पांच घंटे प्रैक्टिस के लिए होने चाहिए और दो घंटे स्पोर्ट्स साइंस पर लगाने चाहिए।

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उन्होंने कहा मुझे एशियाई खेलों में अच्छे नतीजों की उम्मीद है। टीम में कई जूनियर खिलाड़ी शामिल हैं। वे बिना किसी दबाव के खेलते हैं, इसलिए उनके अच्छा प्रदर्शन करने की संभावना है। कंपाउंड तीरंदाजी में हमारी रैंकिंग बहुत अच्छी है, इसलिए कंपाउंड इवेंट से उम्मीदें हैं। रिकर्व में भी पिछली बार (2022 एशियाई खेलों में) पुरुष टीम ने रजत और महिला टीम ने कांस्य पदक जीता था। हमने रिकर्व में भी अच्छा प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। धीरज बोम्मादेवरा अच्छी फॉर्म में हैं। वह पिछले एशियाई खेलों में भी खेले थे और बहुत कम अंतर से व्यक्तिगत मेडल से चूक गए थे। हमें उम्मीद है कि इस बार वह मेडल जीतेंगे। अंकिता भकत भी टीम में हैं और हमारी रिकर्व टीम काफी अनुभवी है।

उन्होंने कहा  पेरिस ओलंपिक 2024 में हम सात इवेंट्स में चौथे स्थान पर रहे। चौथे और तीसरे स्थान पर रहने में फ़र्क तो होता है, लेकिन हमारे लिए चौथे स्थान पर पहुंचना भी पहले के मुक़ाबले एक सुधार है। हमें देश में, खासकर स्कूलों में स्पोर्ट्स कल्चर को बढ़ावा देना चाहिए। माता-पिता को अपने बच्चों को स्पोर्ट्स के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, इससे प्रतिभा का दायरा बढ़ेगा और हम विश्व स्तर के एथलीट तैयार कर पाएंगे।

Pic Credit : ANI

By Naya India

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