ऐसे दो साल पहले कभी नहीं!

सन् 2019-20 के दो वर्षों की तुलना वाले वर्ष भारत के इतिहास में ढूंढे नहीं मिलेंगे। पहला तथ्य कि ये दो वर्ष जनता द्वारा छप्पर फाड़ जिताने के तुरंत बाद के हैं। आजाद भारत के इतिहास में नेहरू से ले कर डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में ऐसा कभी नहीं हुआ कि इधर शपथ हुई और उसके बाद कलह ही कलह के काम! तर्क के नाते ठीक बात है कि जम्मू-कश्मीर से 370 हटाना, सीएए कानून, राम मंदिर निर्माण का काम मामूली नहीं है। इस नाते चाहे तो इन दो सालों को उपलब्धियों के अभूतपूर्व वर्ष कह सकते हैं। जो कोई नहीं कर पाया वह नरेंद्र मोदी-अमित शाह ने कर दिया। तब जरा ठंडे दिल-विवेक से सोचें क्या कश्मीर समस्या का समाधान हो गया? क्या मुसलमान और पाकिस्तान ठंडे पड़ गए? सीएए बना तो क्या बांग्लादेशी भारत से बाहर जा रहे हैं? मंदिर बन रहा है तो क्या रामजी का आशीर्वाद बना है? इतना बड़ा काम है तो रामजी, शिवजी, लक्ष्मीजी क्यों भारत के हिंदुओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रूष्ट हैं? ऐसा क्यों लग रहा है कि भारत से कोई बड़ा पाप हुआ है जो महामारी की सर्वाधिक मार हिंदुओं को झेलनी पड़ रही है? क्यों भाग्यशाली मोदी बदकिस्मती… Continue reading ऐसे दो साल पहले कभी नहीं!

गद्दी पर रहेंगे, शासन क्या करेंगे!

दूसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होते-होते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वहीं स्थिति है, जो 2014 से पहले तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हो गई थी। वे अपने आखिरी तीन साल प्रधानमंत्री रहे यानी गद्दी पर बैठे रहे लेकिन शासन नहीं कर पाए। उन्होंने अगले तीन साल सिर्फ घटनाओं पर प्रतिक्रिया दी। हवा के साथ बहते रहे और अंत नतीजा कांग्रेस की ऐतिहासिक पराजय का निकला। यह भी पढ़ें: भारतः ये दो साल! नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा भी उसी नतीजे पर पहुंचेगी यह अभी नहीं कहा जा सकता है क्योंकि मनमोहन सिंह के मुकाबले मोदी प्रो एक्टिव होकर स्थितियों को संभालने का प्रयास करेंगे। परंतु मोदी सरकार का घटनाओं पर अब नियंत्रण नहीं है। इकबाल भी धीरे धीरे खत्म हो रहा है। सरकार की साख और विश्वसनीयता सात साल में सबसे निचले स्तर पर है। पहली बार ऐसा हुआ है कि उनके समर्थकों के मन में भी अविश्वास पैदा है। कोराना वायरस का संक्रमण शुरू होने से पहले सब कुछ मोदी के कंट्रोल में दिख रहा था। लेकिन पहले संकट ने ही सब कुछ संभाल लेने की उनकी क्षमता पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया। वे कोरोना संकट को नहीं संभाल सके, देश का आर्थिक संकट उनके… Continue reading गद्दी पर रहेंगे, शासन क्या करेंगे!

राजनीतिक नुकसान के दो बरस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके गृह मंत्री अमित शाह को दूसरे कार्यकाल के दो बरस में जितना राजनीतिक नुकसान हुआ है उतना उनके पूरे राजनीतिक करियर में नहीं हुआ होगा। भाजपा ने पिछले दो साल में अपने कई राजनीतिक सहयोगी गंवा दिए। महाराष्ट्र में दशकों से भाजपा की सहयोगी रही शिव सेना ने उसका साथ छोड़ दिया। शिव सेना की तरह ही सबसे पुरानी सहयोगियों में से एक अकाली दल ने कृषि कानूनों और किसान आंदोलन के मुद्दे पर भाजपा का साथ छोड़ दिया। महाराष्ट्र में राजू शेट्टी, बिहार में उपेंद्र कुशवाहा, असम में हाग्राम मोहिलारी जैसे अनेक छोटे छोटे क्षत्रपों ने भाजपा का साथ छोड़ दिया। हो सकता है कि भाजपा को अभी इसके नुकसान का अंदाजा नहीं हो रहा हो पर आने वाले दिनों में सहयोगियों की कमी उसे परेशान करेगी। यह भी पढ़ें: भारतः ये दो साल! लोकसभा चुनाव जीतने के बाद अगस्त के महीने में अनुच्छेद 370 का फैसला कराने और नागरिकता कानून बदलवाने के बाद लग रहा था कि अब आगे कोई भी चुनाव जीतने से भाजपा को कोई नहीं रोक सकता है। लेकिन इन दोनों फैसलों के बाद दो राज्यों- महाराष्ट्र व हरियाणा में में विधानसभा के चुनाव हुए। भाजपा ने महाराष्ट्र की सत्ता… Continue reading राजनीतिक नुकसान के दो बरस

महान असफलताओं के दो साल!

असफलताओं को महान बताना एक किस्म का विशेषण विपर्यय है, लेकिन यह जरूरी है क्योंकि इन दो सालों की असफलताएं इतनी बड़ी हैं कि कोई दूसरा विशेषण उसके साथ न्याय नहीं कर सकता। ये असफलताएं हर किस्म की हैं। यह भी पढ़ें: आंसुओं को संभालिए साहेब! यह भी पढ़ें: कमान हाथ में लेने की नाकाम कोशिश! वैसे तो नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने सात साल हो गए हैं। लेकिन सिर्फ दो साल का आकलन इसलिए क्योंकि पहले पांच साल के उनके कामकाज पर देश की जनता ने अपनी सहमति दी है। उन्हें पहले से ज्यादा वोट और ज्यादा सीटें देकर फिर से सत्ता सौंपी। नोटबंदी और जीएसटी जैसी महान भूलों को जनता ने क्षमा किया या स्वीकार करके आगे बढ़ने का निश्चय किया। उन पांच सालों की बातें भले इतिहास में जिस रूप में दर्ज हुई हों पर भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में उसे एक सफलता के तौर पर देखा जाएगा। उसकी सफलता थी, जो नरेंद्र मोदी ज्यादा बड़े बहुमत के साथ 30 मई 2019 को फिर से देश के प्रधानमंत्री बने। आजाद भारत के इतिहास में वे तीसरे नेता हैं, जिन्होंने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करके लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। अगले हफ्ते उनके… Continue reading महान असफलताओं के दो साल!

भारत खिलाफ प्रचार और हथियार

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर पहुंच चुका है। कांग्रेस, तृणमूल सहित कई स्वघोषित सेकुलरिस्ट अपने प्रचार में पुन: “लोकतंत्र-संविधान खतरे में है” जैसे जुमलों का उपयोग करके सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कटघरे में खड़ा कर रहे है। इस बार इन दलों ने इसके लिए उन विदेशी संगठनों की रिपोर्ट को आधार बनाया है, जिसमें भारत के लोकतांत्रिक स्वरूप के तथाकथित रूप से क्षीण होने और देश में निरंकुशता बढ़ने की बात कही गई है। इन्हीं संगठनों में से एक “फ्रीडम हाउस”, तो दूसरी “वी-डैम” है। निर्विवाद सत्य है कि हमारा देश 800 वर्षों के परतंत्र कालखंड के बाद स्वयं को उभारने हेतु प्रयासरत है और इस दिशा में ऐतिहासिक भूलों को सुधारते हुए अभी बहुत कुछ करना शेष है। हाल के वर्षों में भारत में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन को शेष विश्व अनुभव भी कर रहा है। स्वदेशी कोविड-19 टीका संबंधी भारत का “वैक्सीन मैत्री अभियान”- इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। एक अकाट्य सत्य यह भी है कि भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान के कारण हजारों वर्षों से पंथनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक बना हुआ है। वह ऐसा केवल भारतीय संविधान में “सेकुलर” शब्द जोड़ने या अन्य किसी प्रावधान के… Continue reading भारत खिलाफ प्रचार और हथियार

राहुल ने असम में मुफ्त बिजली का वादा किया

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने असम में वादा किया है कि राज्य में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी तो सभी परिवारों को दो सौ यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जाएगी।

आसू का आंदोलन भाजपा को भारी पड़ेगा

एक तरफ ये पार्टियां हैं, जो सीएए को मुद्दा बनाए रखना चाहती हैं तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी है, जो सीएए लेकर आई है लेकिन उसे मुद्दा नहीं बनने देना चाहती है क्योंकि इससे उसे नुकसान का अंदेशा है।

राहुल समझे सीएए पर सरकार के पैंतरे को

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने असम में पार्टी के प्रदेश ईकाई के हिसाब से नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए पर बयान दिया है।

सीएए नहीं लागू करने का राहुल का ऐलान

कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने रविवार को असम में अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कांग्रेस की चुनावी सभा में ऐलान किया कि कांग्रेस पार्टी किसी हाल में नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए को लागू नहीं होने देगी।

सीएए का वैक्सीनेशन से क्या लेना देना?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कोरोना वायरस को रोकने के लिए चल रहा वैक्सीनेशन अभियान खत्म होने के बाद संशोधित नागरिकता कानून यानी सीएए को लागू किया जाएगा।

शाहीन बाग के फैसले पर पुनर्विचार नहीं

नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में हुए प्रदर्शन को लेकर दिए गए फैसले पर सुप्रीम कोर्ट फिर से विचार नहीं करेगा।

विरोध का अधिकार कभी भी और हर जगह नहीं हो सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष अक्टूबर में अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में नागरिकता संशोधन कानून (सिटिजेनशिप अमेंडमेंट एक्ट – सीएए) के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी के शाहीन बाग में विरोध-प्रदर्शन को अवैध बताया था।

चुनाव तक सीएए से तौबा!

केंद्र सरकार ने सितंबर 2019 में संशोधिक नागरिकता कानून, सीएए संसद से पास कराया था और उसी महीने राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी भी दी थी। उसके बाद करीब डेढ़ साल में केंद्र सरकार इसके नियम नहीं बना पाई है।

न एनआरसी मुद्दा और न सीएए!

पिछले साल के अंत में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने संशोधित नागरिकता कानून यानी सीएए और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी का मुद्दा नहीं उठाया तो माना गया कि नीतीश कुमार के साथ एलायंस की वजह से पार्टी चुप रही है।

सीएए को लेकर भाजपा दुविधा में

भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने भले कह दिया है कि जनवरी से संशोधित नागरिकता कानून यानी सीएए बंगाल में लागू हो जाएगा।

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