जाति राजनीति का विस्फोट होना है
नीतीश सरकार की कराई जाति गणना के बाद बिहार में पहला चुनाव है। यह चुनाव कई तरह से राजनीति को बदलने वाला है। आखिरी बार अंग्रेजी राज में 1931 में जाति गणना हुई थी और उसके बाद भी जातियों का ध्रुवीकरण नए तरह से हुआ था। उस समय कांग्रेस के सवर्ण नेतृत्व के खिलाफ यादव, कोईरी और कुर्मी का त्रिवेणी संघ बना था, जिसने 1937 के चुनाव में कई इलाकों में कांग्रेस को हरा दिया था। हालांकि कांग्रेस के मजबूत संगठन, आजादी की लड़ाई के बड़े लक्ष्य और अगड़ी जातियों की ओर से हुए अति हिंसक प्रतिरोध की वजह से...