Caste politics

  • जाति राजनीति का विस्फोट होना है

    नीतीश सरकार की कराई जाति गणना के बाद बिहार में पहला चुनाव है। यह चुनाव कई तरह से राजनीति को बदलने वाला है। आखिरी बार अंग्रेजी राज में 1931 में जाति गणना हुई थी और उसके बाद भी जातियों का ध्रुवीकरण नए तरह से हुआ था। उस समय कांग्रेस के सवर्ण नेतृत्व के खिलाफ यादव, कोईरी और कुर्मी का त्रिवेणी संघ बना था, जिसने 1937 के चुनाव में कई इलाकों में कांग्रेस को हरा दिया था। हालांकि कांग्रेस के मजबूत संगठन, आजादी की लड़ाई के बड़े लक्ष्य और अगड़ी जातियों की ओर से हुए अति हिंसक प्रतिरोध की वजह से...

  • जाति नहीं बताएंगे तो राजनीति कैसे करेंगे?

    इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जातिवाद को रोकने के जिस तरह के उपायों की घोषणा की है उससे खलबली मची है। सबसे ज्यादा परेशान राज्य की सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी पार्टियां ही हैं क्योंकि वे सभी किसी न किसी खास जाति की राजनीति करती हैं। भाजपा खुद भी सामाजिक समीकरण बना कर राजनीति करने वाली पार्टी है और सबसे पहले उत्तर प्रदेश के संदर्भ में ही भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग की बात सुनने को मिली थी, जब कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बनाए गए थे। मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी विशुद्ध जातीय राजनीति वाली पार्टी है।...

  • जाति जाए तो कैसे?

    हाई कोर्ट ने राय जताई कि जाति आधारित रैलियां राजनीतिक मकसद से आयोजित होती हैं, जिनसे समाज में टकराव बढ़ता है। यह सार्वजनिक व्यवस्था एवं राष्ट्रीय एकता के खिलाफ है। यूपी सरकार ने कोर्ट की राय का समर्थन किया है। जातीय पहचान और प्रतीकों का प्रदर्शन इतने भौंडे स्तर तक पहुंच चुका है कि उस पर किसी विवेकशील व्यक्ति को व्यग्रता महसूस हो सकती है। मुमकिन है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज भी ऐसी ही भावना से प्रेरित हुए हों, जब उन्होंने उत्तर प्रदेश में जाति आधारित रैलियों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। यूपी सरकार ने तत्परता दिखाते...

  • ताकतवर जातियों का सियासी समय खत्म!

    भारत की राजनीति का सिर्फ ऊपरी आवरण नहीं बदल रहा है, बल्कि वह अंदर से बदल रही है। राजनीति को प्रभावित करने वाली कुछ बेहद बुनियादी चीजों में बदलाव हो रहा है। इसमें कई चीजों को शामिल किया जा सकता है। जैसे सांप्रदायिकता बहुत गहरे जड़ जमा चुकी है और मतदाताओं के राजनीतिक व्यवहार को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही है। जैसे ‘मुफ्त की रेवड़ी’ चुनाव जीतने का सबसे महान मंत्र बन चुका है। Caste politics जैसे संचार के आधुनिक साधनों का इस्तेमाल करके ‘वैकल्पिक सत्य’ या ‘सरासर झूठ’ का प्रचार चुनाव जीतने के एक अहम टूल के तौर पर...