बूढ़ा पहाड़
ये नजरिया ठीक नहीं

न्यायपालिका और सरकार टकराव के रास्ते पर हैँ। इसके बीच अगर यह धारणा बनी कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सरकार और संकुचित करना चाहती है, तो उससे लोकतंत्र के प्रति जन-आस्था पर फर्क पड़ सकता है।  

कॉलेजियम के पक्ष में चंद्रचूड़

केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजीजू की मौजूदगी में चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कॉलेजियम को अच्छा सिस्टम बताया।

कॉलेजियम पर सरकार बनाम न्यायपालिका

सर्वोच्च अदालत और उच्च अदालतों में जजों की नियुक्ति के कॉलेजियम सिस्टम को लेकर सरकार और न्यायपालिका दोनों आमने सामने आ गए हैं।

कॉलेजियम की सिफारिशें कब तक मानेगी सरकार

सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने कई राज्यों के हाई कोर्ट्स में चीफ जस्टिस और दूसरे जजों की नियुक्ति की रिकार्ड सिफारिशें भेजी हैं।

आठ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए सिफारिश

सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम की ओर से उच्च अदालतों में नियुक्ति के लिए भेजी गई 68 नामों की सूची पर अभी तक सरकार ने फैसला नहीं किया है लेकिन उससे पहले ही कॉलेजियम ने एक और रिकार्ड सिफारिश की है।

चीफ जस्टिस की अपील क्या सुनी जाएगी?

सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने जो नाम भेजे हैं उनमें 12 नाम ऐसे हैं, जो पहले भी भेजे गए थे लेकिन सरकार ने उन्हें मंजूरी नहीं दी थी।

भारत पहली महिला CJI पाने के करीब, SC ने एससी एलिवेशन के लिए कॉलेजियम द्वारा भेजे गए 9 नामों को मंजूरी दी

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा प्रस्तावित सभी नौ नामों को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में भर्ती के लिए सरकार ने मंजूरी दे दी है।

पहली महिला चीफ जस्टिस का बात

छह साल के बाद देश को पहली महिला चीफ जस्टिस मिल सकती है। अगर सब कुछ सामान्य ढंग से चलता रहा तो 2027 के सितंबर में जस्टिस वीबी नागरत्ना देश की पहली महिला चीफ जस्टिस बनेंगी।

अब कॉलेजियम में बन जाएगी सहमति!

क्या अब सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम में सहमति बन जाएगी? सर्वोच्च अदालत के सम्मानित जज जस्टिस रोहिंटन एफ नरीमन गुरुवार को रिटायर हो गए। सर्वोच्च अदालत और राज्यों की उच्च अदालतों में जजों की नियुक्ति और उनके तबादले का फैसला करने वाली सुप्रीम कोर्ट

जजों की नियुक्ति क्यों रूकी है?

देश के न्यायिक इतिहास में जो कभी नहीं हुआ वह अब हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर चीफ जस्टिस कहीं राज्यपाल बन रहे हैं तो कहीं राज्यसभा में भेजे जा रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत जज सार्वजनिक रूप से राजनीतिक नेतृत्व की तारीफ कर रहे हैं।

नौ जजों को स्थाई करने का प्रस्ताव मंजूर

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने नौ अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थाई न्यायाधीश नियुक्त करने के मद्रास उच्च न्यायालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने बुधवार को न्यायमूर्ति पी टी आशा, न्यायमूर्ति एम निर्मल कुमार, न्यायमूर्ति सुब्रमणनियम प्रसाद, न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश, न्यायमूर्ति जी के इलांतीरैयन, न्यायमूर्ति कृष्णन रामासामी, न्यायमूर्ति सी सरवनन, न्यायमूर्ति बी पुगलेन्डी और न्यायमूर्ति संतिलकुमार राममूर्ति को स्थाई न्यायाधीश नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

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