अब फिक्र भी नहीं!
जिस दौर में सरकारों की मेधा पर्यावरण संरक्षण कानूनों को इस तरह तोड़ने- मरोड़ने में लगी हो, जिससे ये प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन में आड़े ना आएं, उनसे किसी प्रकार के हल की उम्मीद रखना बेबुनियाद ही है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र पर छाये स्मॉग से जल्द राहत मिलने की संभावना नजर नहीं आती। इसका खतरनाक प्रभाव यहां के बाशिंदों पर हो रहा है। खुद भारत सरकार ने कहा है कि अस्पतालों में सांस संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिनका सीधा संबंध प्रदूषित हवा से है। स्वास्थ्य राज्यमंत्री विक्रमजीत एस. साहनी ने राज्यसभा में बताया कि 2022 से...